पटना: शिक्षक अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है. अब सवाल उठ रहा कि आखिर सरकार चुप क्यों है. चुनाव से पहले बड़े तामझाम के साथ वर्ष 2019 में शिक्षा विभाग की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस करके घोषणा की गई कि 39 हजार से ज्यादा प्राथमिक और 30 हजार से ज्यादा माध्यमिक व उच्च माध्यमिक शिक्षकों का नियोजन होगा.
नियोजन की प्रक्रिया जुलाई 2019 में शुरू हुई और विभिन्न कारणों से स्थगित होते-होते छठे चरण के नियोजन की प्रक्रिया आखिरकार हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हो पाई. पटना हाईकोर्ट ने 4 दिसंबर को आदेश जारी किया कि नियोजन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द बिहार सरकार पूरा करे. इसके बावजूद नियोजन का काम लटक गया.
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मीडिया से बच रहे हैं शिक्षा मंत्री
बिहार सचिवालय में अधिकारियों की तरफ से अभ्यर्थियों को दो टूक कह दिया गया कि नियोजन का काम हमारे हाथ में नहीं है. सरकार की तरफ से हरी झंडी मिलेगी तभी हम शिक्षकों की बहाली कर पाएंगे. इसके बाद अभ्यर्थियों ने आंदोलन शुरू किया. आंदोलन पर पुलिस का डंडा चला. इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी शिक्षक अभ्यर्थियों के सपोर्ट में आ गए. इसके बाद भी सरकार चुप्पी साधे हुए है. शिक्षा मंत्री लगातार मीडिया से बच रहे हैं. मुख्यमंत्री भी इस मामले में बोलने से इनकार कर रहे हैं. ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब सरकार ने खुद बहाली निकाली थी तो अब पीछे क्यों हट रही है.
परेशान हैं शिक्षक अभ्यर्थी
शिक्षक अभ्यर्थी परेशान और हताश हैं. यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर हमसे क्या गलती हुई. हमने अपना इतना समय दिया. इतना खर्च किया और सभी जगह आवेदन दिया. नियोजन इकाइयों ने लिस्ट भी निकाल दी फिर भी काउंसलिंग की डेट क्यों नहीं जारी हो रही है.
इधर विपक्ष का कहना है कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री नौकरी देने के मूड में नहीं हैं. उन्हें जवाब देना होगा कि शिक्षक अभ्यर्थियों को नौकरी क्यों नहीं मिल रही. उन्हें यह भी जवाब देना होगा कि 20 लाख रोजगार कैसे देंगे.
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