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Lockdown Effect: बाल अधिकार संरक्षण आयोग में नहीं आ रहा एक भी केस - कोरोना लेटेस्ट न्यूज

लॉकडाउन में रियायत के बाद सरकारी कार्यालयों में काम शुरू हो गया है. लेकिन, अभी भी लोग न के बराबर आ रहे हैं. ऐसे में कर्मचारियों का पूरा दिन व्यर्थ हो जा रहा है.

बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग
बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग
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Published : May 3, 2020, 9:09 AM IST

पटना: लॉकडाउन का व्यापक असर आम जन जीवन पर पड़ा है. लोग घरों में कैद हो गए हैं और काम-काज ठप पड़े हैं. ऐसे में आर्थिक दृष्टिकोण से सोचते हुए सरकार ने लॉकडाउन में कुछ रियारतें दीं, जिसके बाद कई दफ्तर-कार्यालय खुल गए. लेकिन, इनमें काम नहीं आ रहा है. कुछ ऐसा ही हाल राजधानी के हार्डिंग रोड स्थित बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग कार्यालय का है.

दरअसल, लॉकडाउन के बाद से ही यहां एक भी मामला नहीं आया है. ऐसे में कर्मचारी बेवजह पूरा दिन कार्यालय में खाली बैठने को मजबूर हैं. रोज की तरह कार्यालय खुल रहा है, कुछ कर्मी भी पहुंच रहे हैं. लेकिन,बाल आयोग के कोई मामले नहीं आ रहे हैं. कर्मचारी से ऑनलाइन मामलों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों ही जगहों पर कोई केस नहीं है.

patna
खाली पड़ा बाल अधिकार संरक्षण आयोग कार्यालय

आकर पूरा दिन बैठना पड़ता है- कर्मचारी
कार्यालय में बैठे कर्मियों ने बताया कि काम नहीं रहता है. ऐसे में सदस्य भी कम ही आते हैं. क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना वायरस का डर रहता है. वैसे भी जब मामले ही नहीं आएंगे तो काम कैसे होगा. अन्य सदस्य ने जानकारी दी कि लॉकडाउन के पहले 15-20 या 20 से 25 मामले प्रति महीने आ जाते थे, जिनकी सुनवाई होती थी और उनका समाधान किया जाता था. लेकिन, लॉकडाउन के बाद से एक भी मामला नहीं आया है.

पटना: लॉकडाउन का व्यापक असर आम जन जीवन पर पड़ा है. लोग घरों में कैद हो गए हैं और काम-काज ठप पड़े हैं. ऐसे में आर्थिक दृष्टिकोण से सोचते हुए सरकार ने लॉकडाउन में कुछ रियारतें दीं, जिसके बाद कई दफ्तर-कार्यालय खुल गए. लेकिन, इनमें काम नहीं आ रहा है. कुछ ऐसा ही हाल राजधानी के हार्डिंग रोड स्थित बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग कार्यालय का है.

दरअसल, लॉकडाउन के बाद से ही यहां एक भी मामला नहीं आया है. ऐसे में कर्मचारी बेवजह पूरा दिन कार्यालय में खाली बैठने को मजबूर हैं. रोज की तरह कार्यालय खुल रहा है, कुछ कर्मी भी पहुंच रहे हैं. लेकिन,बाल आयोग के कोई मामले नहीं आ रहे हैं. कर्मचारी से ऑनलाइन मामलों के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा कि ऑनलाइन-ऑफलाइन दोनों ही जगहों पर कोई केस नहीं है.

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खाली पड़ा बाल अधिकार संरक्षण आयोग कार्यालय

आकर पूरा दिन बैठना पड़ता है- कर्मचारी
कार्यालय में बैठे कर्मियों ने बताया कि काम नहीं रहता है. ऐसे में सदस्य भी कम ही आते हैं. क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना वायरस का डर रहता है. वैसे भी जब मामले ही नहीं आएंगे तो काम कैसे होगा. अन्य सदस्य ने जानकारी दी कि लॉकडाउन के पहले 15-20 या 20 से 25 मामले प्रति महीने आ जाते थे, जिनकी सुनवाई होती थी और उनका समाधान किया जाता था. लेकिन, लॉकडाउन के बाद से एक भी मामला नहीं आया है.

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