पटना: बिहार राजभवन में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल फागू चौहान (Governor Phagu Chauhan ) ने डॉ. सी एल सोनकर (Dr CL Sonkar) द्वारा लिखित पुस्तक 'उत्तर प्रदेश के लोक धर्मी कवि एवं समाज' का विमोचन किया. इस दौरान कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि मातृभाषा हिंदी में भावों का संप्रेषण सहज एवं ग्राह्य है. इसे बोलने और समझने वालों की संख्या भारत में सर्वाधिक है.
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राज्यपाल ने कहा कि डॉ. सोनकर ने इस पुस्तक में लोग धर्म से संबंधित उत्तर प्रदेश के 61 संतों और कवियों के पदों का मार्मिक वर्णन किया है. विभिन्न शिक्षण संस्थानों में इन संतों और कवियों के साथ-साथ इनकी रचनाओं के बारे में भी पढ़ाया जाता है. साथ ही इन पर शोध कार्य लगातार किए जा रहे हैं.
राज्यपाल फागू चौहान ने कहा कि डॉ. सोनकर की इस कृति में अवधी, भोजपुरी, बुंदेली, कन्नौजी और कौरवी और बृज लोक साहित्य की रचनाओं को भी दिखाने का प्रयास किया गया है. उनके लेखन में ऐतिहासिक दृष्टिकोण अपनाते हुए गुरु गोरखनाथ से लेकर भारतेंदु तक, लोकगीतों और मूल्यों एवं समय की परंपराएं और लोक संस्कृति को दर्शाने का प्रयास किया गया है.
राज्यपाल ने कहा कि इस कृति के माध्यम से एक तरफ उत्तर प्रदेश के लोग धर्म कवि और समाज के विवरणों का तथ्यपरक लेखांकन किया गया है. वहीं, दूसरी तरफ विद्वानों के विभिन्न मतों के माध्यम से हिंदी भाषा की उत्पत्ति को प्राकृत से जोड़ने का भी प्रयास किया गया है. इस पुस्तक की रचना में यह भी प्रयास किया गया है कि यहां के समाज और साहित्य के आंदोलन की विचारधाराओं का कोई पक्ष अछूता न रहे.
बात दें कि डॉ. सी एल सोनकर उत्तर प्रदेश सरकार के प्रांतीय सिविल सेवा के अधिकारी हैं. राजभवन के दरबार हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र प्रताप सिंह, पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर गिरीश कुमार चौधरी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर अब्दुल मतीन ने भी संबोधित किया. इस मौके पर राज्यपाल के सचिव भी मौजूद थे.
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