पटना: कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते देशव्यापी लॉक डाउन लागू है. इस संकट काल में देश का हर तबका परेशान है. इसी बीच सरकार ने कुछ शर्तों के आधार पर लॉकडाउन में रियायतें दी हैं. कुछ दुकानदारों को दुकानें खोलने की छूट भी मिली है. लेकिन उसके अंतर्गत कई गाइडलाइंस दिए गए हैं. जिनका पालन करना सबको बेहद जरूरी है.
'हमारी भी गुहार सुनें सरकार'
राजधानी पटना के अनिशाबाद स्थित पंजाबी कॉलोनी के कपड़ा व्यवसायी काफी परेशान है. कपड़ा व्यवसायी गुरमीत सिंह समेत कई अन्य व्यवसाइयों ने बताया कि वे लोग बंदी के वजह से काफी परेशान है. उन्होंने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से कई बार बात करने कि कोशिश की. लेकिन उनकी कोई सुनने वाला नहीं है.
'सरकार कर रही भेदभाव'
बता दें कि पंजाबी कॉलोनी में करीब 50 से 60 कपड़ा व्यवसायीयों की दुकान है. लॉक डाउन की वजह से पिछले डेढ़ महीने से अधिक से सभी दुकानें बंद है. कपड़ा व्यवसायीयों का कहना है कि बचे हुए पैसों से अब तक घर चल रहा था. लेकिन अब हालत बद से बदतर हो चुकी है. व्यवसायी हीरा सिंह ने बताया कि 50 दिन से दुकानें बंद है. किसी तरह घर परिवार चल रहा था. लेकिन अब स्थिति बिल्कुल खराब हो चुकी है. घर में राशन नहीं है और नाही पैसे बचे हुए हैं. ऐसे में अब हम क्या करें कोई हमारी मदद नहीं कर रहा.
'हमें भी दुकान खोलने की छूट दे सरकार'
वहीं, कई व्यवसायी काफी आक्रोशित दिखे. उन्होंने कहा कि सरकार ने लगभग सभी दुकानदारों को रियायत दी है. गाइडलाइंस के तहत दुकान खोली जा रही है. हम भी सरकार के सभी नियमों का मानने को तैयार हैं. हमें भी दुकाम खोलने रियायत दी जाए. सरकार हमारे साथ भेदभाव कर रही है. यह बिल्कुल गलत है. किसी को हमारी चिंता नहीं. वहीं एक वृद्ध महिला कपड़ा व्यवसाई ने बताया कि घर में बच्चे बीमार हैं. दुकानें बंद हैं. कमाई का कोई अन्य साधन नहीं है. हमारी सरकार से एक ही मांग है कि हमें भी दुकानें खोलने के लिए छूट दी जाए.
'केवल बातें बना रही है सरकार'
व्यवसायी गुरमीत सिंह ने बताया कि सरकार सिर्फ बातें बना रही हैं. सरकार ने कहा था कि ईएमआई नहीं कटेगा. स्कूलों के तरफ से फीस नहीं लिया जाएगा. लेकिन ऐसा हो रहा है ईएमआई भी कटा गया और स्कूलों में फीस भी लिए जा रहे हैं. सरकार जो राशन मुहैया करा रही है उसे जानवर ना खाए. हालांकि सरकार के द्वारा दी गई 1000 रूपये की राशि खाते में जरूर आए हैं. इससे हम क्या करें. बच्चों का स्कूल फीस भरे. बिजली बिल दे या फिर किराया दें या बच्चों के लिए खाना लाए. उन्होंने कहा कि हमारी कोई नहीं सुन रहा. हम आपके माध्यम से सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना चाहते हैं कि हमें भी सरकार दिन निर्धारित करते हैं या कुछ घंटे ही निर्धारित कर दें. जिसमें हम अपना दुकान खोल सके.