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नालंदा के कपिलदेव प्रसाद ने तैयार की नायाब वॉल हैंगिंग, भारत सरकार से मिलेगा सम्मान - Basavan Bigha village of Nalanda

कपिलदेव प्रसाद 15 वर्ष की आयु से ही इस उद्योग से जुड़े हैं. तकरीबन 3 महीने की लगातार कोशिश के बाद उन्होंने बोधि वृक्ष के नीचे बैठे भगवान बुद्ध की ध्यान मुद्रा में प्रतिमा बुनी, जिसे लोगों ने काफी सराहा है.

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Published : Dec 31, 2019, 8:11 AM IST

नालंदा: बिहार हमेशा से ही कला और ज्ञान का धनी रहा है. साल 2019 में भी बिहार के लोगों ने ज्ञान और कला के क्षेत्र में कई अद्भुत काम किया है. उन्होंने कई उदाहरण पेश किए. इस साल नालंदा जिले के बुनकर कपिलदेव प्रसाद को उनकी वॉल हैंगिंग के लिए भारत सरकार ने सराहा है. दरअसल, कपिलदेव प्रसाद का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया है. जिससे नालंदा के लोगों में काफी खुशी देखने को मिल रही है.

बता दें कि सम्मानित करने के लिए पूरे देश से 31 लोगों को चुना गया है. जिसमें बिहार से एकलौते कपिलदेव प्रसाद शामिल हैं. भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने उनकी कला को पसंद किया. उन्हें जल्द ही सम्मानित किया जाएगा. कपिलदेव प्रसाद नालंदा के बसवन बीघा गांव के रहने वाले हैं.

Nalanda
बाजारवाद का शिकार हुई कला

राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने की थी सराहना
बसवन बीघा गांव अपनी कला के लिए दशकों से प्रसिद्ध रहा है. यहां बनने वाली बाबन बुटी साड़ी, पर्दे, चादर, नैपकिन, मैट देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना परचम लहरा चुके हैं. डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इस गांव की कला इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने भी यहां बने पर्दे राष्ट्रपति भवन में लगवाए थे. उस दौरान ही इस गांव की कला को ख्याति मिली.

देखें पूरी रिपोर्ट

3 महीने के प्रयास के बाद तैयार की हैंगिंग
कपिलदेव प्रसाद 15 वर्ष की आयु से ही इस उद्योग से जुड़े हैं. तकरीबन 3 महीने की लगातार कोशिश के बाद उन्होंने बोधि वृक्ष के नीचे बैठे भगवान बुद्ध की ध्यान मुद्रा में प्रतिमा बुनी, जिसे लोगों ने काफी सराहा है. कपिलदेव ने एक वॉल हैंगिंग बनाई है जो कि बेहद खूबसूरत है. कपिलदेव के चयन से बुनकर उद्योग से जुड़े लोगों में काफी खुशी देखने को मिल रही है. कपिलदेव के सहयोगियों का कहना है कि इस प्रकार पुरस्कार और सम्मान मिलने से बुनकर क्षेत्र से जुड़े लोगों में उत्साह बढ़ेगा.

नालंदा: बिहार हमेशा से ही कला और ज्ञान का धनी रहा है. साल 2019 में भी बिहार के लोगों ने ज्ञान और कला के क्षेत्र में कई अद्भुत काम किया है. उन्होंने कई उदाहरण पेश किए. इस साल नालंदा जिले के बुनकर कपिलदेव प्रसाद को उनकी वॉल हैंगिंग के लिए भारत सरकार ने सराहा है. दरअसल, कपिलदेव प्रसाद का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया है. जिससे नालंदा के लोगों में काफी खुशी देखने को मिल रही है.

बता दें कि सम्मानित करने के लिए पूरे देश से 31 लोगों को चुना गया है. जिसमें बिहार से एकलौते कपिलदेव प्रसाद शामिल हैं. भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने उनकी कला को पसंद किया. उन्हें जल्द ही सम्मानित किया जाएगा. कपिलदेव प्रसाद नालंदा के बसवन बीघा गांव के रहने वाले हैं.

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राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने की थी सराहना
बसवन बीघा गांव अपनी कला के लिए दशकों से प्रसिद्ध रहा है. यहां बनने वाली बाबन बुटी साड़ी, पर्दे, चादर, नैपकिन, मैट देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अपना परचम लहरा चुके हैं. डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद को इस गांव की कला इतनी पसंद आई थी कि उन्होंने भी यहां बने पर्दे राष्ट्रपति भवन में लगवाए थे. उस दौरान ही इस गांव की कला को ख्याति मिली.

देखें पूरी रिपोर्ट

3 महीने के प्रयास के बाद तैयार की हैंगिंग
कपिलदेव प्रसाद 15 वर्ष की आयु से ही इस उद्योग से जुड़े हैं. तकरीबन 3 महीने की लगातार कोशिश के बाद उन्होंने बोधि वृक्ष के नीचे बैठे भगवान बुद्ध की ध्यान मुद्रा में प्रतिमा बुनी, जिसे लोगों ने काफी सराहा है. कपिलदेव ने एक वॉल हैंगिंग बनाई है जो कि बेहद खूबसूरत है. कपिलदेव के चयन से बुनकर उद्योग से जुड़े लोगों में काफी खुशी देखने को मिल रही है. कपिलदेव के सहयोगियों का कहना है कि इस प्रकार पुरस्कार और सम्मान मिलने से बुनकर क्षेत्र से जुड़े लोगों में उत्साह बढ़ेगा.

Intro:बुनकर कपिलदेव प्रसाद का राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया चयन
नालंदा के लोगों में देखी गई काफी खुशी
जिले को किया गौरवान्वित
नालंदा। वर्ष 2019 बीतने को है लेकिन यह वर्ष जिले के लिए यादगार साबित हुआ। बुनकर के क्षेत्र में नालंदा जिला का बसवन बीघा गांव लंबे समय से चर्चित रहा है । यहां निर्मित बाबन बुटी साड़ी, पर्दा, चादर, नैपकिन, मैट देश ही नहीं विदेशों में भी अपना परचम लहरा चुका है । भारत के राष्ट्रपति निवास की शोभा बढ़ा चुके हैं यहां के पर्दा । लेकिन वर्ष 2019 में कपिल देव प्रसाद का चयन भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया जिससे जिले में काफी खुशी देखी गई। लोग गौरवान्वित महसूस करने लगे । यह पहला मौका है जब बुनकर के क्षेत्र में कपिल देव प्रसाद का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया। कपड़ा मंत्रालय द्वारा कुल 31 बुनकरों का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया जिसमें बिहार के एकमात्र बुनकर के रूप में कपिलदेव प्रसाद का चयन किया गया।


Body:कपिल देव प्रसाद के द्वारा करीब 3 माह के अथक प्रयास के बाद भगवान बुद्ध की ध्यान मुद्रा में बोधि वृक्ष के नीचे बैठे प्रतिमा का एक वॉल हैंगिंग तैयार किया था। यह बाल हैंगिंग लोगों के बीच काफी पसंद किया गया और इसे सभी लोगों ने काफी सराहा। इसी वॉल हैंगिंग बल पर कपिल देव प्रसाद का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए किया गया।
इनके चयन से बुनकर के उद्योग से जुड़े लोगों में काफी खुशी देखी गई और उम्मीद जताई गई कि इस प्रकार के पुरस्कार मिलने के बाद बुनकर के क्षेत्र में लोगों का उत्साह बढ़ेगा। सरकार के द्वारा इसी प्रकार के प्रोत्साहन दिए जाने से बुनकरों में उम्मीद की किरण जागेगी और आने वाले दिनों में बुनकर उद्योग में चार चांद लगेगा।
कपिल देव प्रसाद 15 वर्ष की आयु से ही इस उद्योग से जुड़े हैं और करीब 50 सालों से बुनकर का काम करते आ रहे हैं । अभी भी खुद बुनकरी का काम करते हैं इसके साथ-साथ लोगों लोगों से भी बुनकरी का काम करवाते हैं जिससे रोजगार के अवसर भी प्रदान होते हैं ।


Conclusion:सरकार द्वारा बुनकर उद्योग को दिए जाने वाले प्रोत्साहन से उम्मीद की एक किरण जगी है और लोगों में यह उम्मीद है कि आने वाले दिनों में बुनकर उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में लोग इस से जुड़ेंगे जिससे रोजगार के भी अवसर प्रदान होंगे।
बाइट। कपिलदेव प्रसाद, बुनकर
बाइट। शोभा कुमार, क्लस्टर डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव
बाइट। मो शहाब, बुनकर
पी टू सी कुमार सौरभ, नालंदा
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