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गोपालगंज के रामकलावन बने इस देश के राष्ट्रपति, फिर भी परिवार वाले नाखुश - Seychelles President

गोपालगंज के रामकलावन सेशेल्स के राष्ट्रपति चुने गए हैं. लिहाजा उनके पैतृक गांव में खुशी है लेकिन परिवार वालों का आरोप है कि जब वो गांव आए थे तो प्रशासन के लोगों ने उनसे मिलने तक नहीं दिया था.

Gopalganj
वैवेल रामकलावन
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Published : Oct 30, 2020, 1:32 PM IST

गोपालगंज: परसौनी निवासी वैवेल रामकलावन 'सेशेल्स' देश के राष्ट्रपति चुने जाने से उनके गांव वालों व परिवार में खुशी की लहर है. वहीं, दूसरी तरफ रामकलावन के परिवार वोलों में प्रशासन के खिलाफ काफी गुस्सा है. दरअसल, परिवार वालों का आरोप है कि जब 2018 में वैवेल रामकलावन अपने गांव (गोपालगंज) आए थे, तब उन्हें उसे मिलने नहीं दिया गया था.

135 साल पहले सेशेल्स चले गए थे रामकलावन के परिवार वाले
बता दें, वैवेल रामकलावन के पिता हरिचरण महतो अपने भाई जयराम महतो के साथ नमक का कारोबार करने के लिए 135 साल पहले कोलकाता गए थे. कोलकाता में दोनों भाई गांव वालों के साथ 6 साल तक कारोबार करने के बाद बिछड़ गए. तीन साल तक इंतजार करने के बाद जयराम महतो वापस परसौनी आ गये थे, लेकिन इस बीच पता चला कि हरिचरण महतो जहाज से सेशेल्स चले गए हैं.

रामकलावन के पूर्वज गोपालगंज के थे रहने वाले
सेशेल्स देश के राष्ट्रपति चुने गए वैवेल रामकलावन के पूर्वज गोपालगंज के बरौली प्रखंड के परसौनी गांव के रहने वाले थे. राष्ट्रपति चुने जाने की खबर मिलते ही परसौनी गांव में खुशियां छा गई. वैवेल रामकलावन के चचेरे भाई 82 वर्षीय रघुनाथ महतो व उनका पूरा परिवार आज उनके आने का इंतजार कर रहे हैं.

2 साल पहले अपने गांव आए थे रामकलावन
वर्ष 2018 जनवरी महीने में अपने पुरखों की धरती गोपालगंज पहुंचे रामकलावन ने बिहार और अपने पुरखों की धरती को अपना बताते हुए कहा था कि आज मैं जो भी हूं, इसी धरती की वजह से हूं. इस धरती पर पहुंचते ही ऐसा आभास हो रहा है कि हर घर मेरा अपना ही है.

रामकलावन के परसौनी आने का इंतजार
वहीं, ईटीवी भारत की टीम जब वैवेल रामकलावन के गांव पहुंची तो उनके परिवार के लोग ने कहा कि आज हम लोग काफी खुश है कि हमारा खून राष्ट्रपति बना है, लेकिन दुःख इस बात का है कि जब वो हमारे गांव आए थे, तब हम लोगों को उनसे प्रशासन ने मिलने नहीं दिया था. परिवार वालों ने बताया कि अब हम लोगों के साथ ही पूरे गांव के लोगों को उनके पुनः आने का इंतजार है.

गोपालगंज: परसौनी निवासी वैवेल रामकलावन 'सेशेल्स' देश के राष्ट्रपति चुने जाने से उनके गांव वालों व परिवार में खुशी की लहर है. वहीं, दूसरी तरफ रामकलावन के परिवार वोलों में प्रशासन के खिलाफ काफी गुस्सा है. दरअसल, परिवार वालों का आरोप है कि जब 2018 में वैवेल रामकलावन अपने गांव (गोपालगंज) आए थे, तब उन्हें उसे मिलने नहीं दिया गया था.

135 साल पहले सेशेल्स चले गए थे रामकलावन के परिवार वाले
बता दें, वैवेल रामकलावन के पिता हरिचरण महतो अपने भाई जयराम महतो के साथ नमक का कारोबार करने के लिए 135 साल पहले कोलकाता गए थे. कोलकाता में दोनों भाई गांव वालों के साथ 6 साल तक कारोबार करने के बाद बिछड़ गए. तीन साल तक इंतजार करने के बाद जयराम महतो वापस परसौनी आ गये थे, लेकिन इस बीच पता चला कि हरिचरण महतो जहाज से सेशेल्स चले गए हैं.

रामकलावन के पूर्वज गोपालगंज के थे रहने वाले
सेशेल्स देश के राष्ट्रपति चुने गए वैवेल रामकलावन के पूर्वज गोपालगंज के बरौली प्रखंड के परसौनी गांव के रहने वाले थे. राष्ट्रपति चुने जाने की खबर मिलते ही परसौनी गांव में खुशियां छा गई. वैवेल रामकलावन के चचेरे भाई 82 वर्षीय रघुनाथ महतो व उनका पूरा परिवार आज उनके आने का इंतजार कर रहे हैं.

2 साल पहले अपने गांव आए थे रामकलावन
वर्ष 2018 जनवरी महीने में अपने पुरखों की धरती गोपालगंज पहुंचे रामकलावन ने बिहार और अपने पुरखों की धरती को अपना बताते हुए कहा था कि आज मैं जो भी हूं, इसी धरती की वजह से हूं. इस धरती पर पहुंचते ही ऐसा आभास हो रहा है कि हर घर मेरा अपना ही है.

रामकलावन के परसौनी आने का इंतजार
वहीं, ईटीवी भारत की टीम जब वैवेल रामकलावन के गांव पहुंची तो उनके परिवार के लोग ने कहा कि आज हम लोग काफी खुश है कि हमारा खून राष्ट्रपति बना है, लेकिन दुःख इस बात का है कि जब वो हमारे गांव आए थे, तब हम लोगों को उनसे प्रशासन ने मिलने नहीं दिया था. परिवार वालों ने बताया कि अब हम लोगों के साथ ही पूरे गांव के लोगों को उनके पुनः आने का इंतजार है.

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