दरभंगा: 16 दिसंबर को मधुबनी के सकरी में हुई पेट्रोल पंप डीलर की हत्या और लूट के विरोध में शुक्रवार और शनिवार को दरभंगा और मधुबनी जिले के पेट्रोल पंप बंद रहे. जबकि बिहार के बाकी 36 जिलों में पेट्रोल पंप कर्मियों ने काला बिल्ला लगाकर काम किया. बिहार राज्य पेट्रोल-डीजल डीलर्स एसोसिएशन ने घटना पर नीतीश सरकार के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए राज्य भर में आंदोलन की चेतावनी दी है.
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष प्रभाष कुमार सिंह शुक्रवार की शाम मधुबनी पहुंचे और पीड़ित परिवार से मिले. उन्होंने दरभंगा में एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि पेट्रोल-डीजल व्यवसायियों को सरकार केवल टैक्स वसूली का जरिया समझती है. सरकार उनकी सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं करती है. उन्होंने कहा कि 38 जिलों वाले बिहार राज्य में हर दिन कहीं न कहीं, कोई न कोई आपराधिक वारदात होती है. नीतीश कुमार सुशासन के नाम पर जीत कर आए थे, लेकिन 2-3 साल बाद ही उनका इकबाल खत्म हो गया. उन्होंने सीएम, डिप्टी सीएम, डीजीपी और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर पेट्रोल पंपों पर सुरक्षा की मांग की है.
पुलिस का आमनवीय रूप- प्रभाष कुमार
पेट्रोल-डीजल एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि अगर सुरक्षा नहीं मिलती है तो राज्यव्यापी आंदोलन होगा. उन्होंने सकरी पेट्रोल पंप लूट के बाद पुलिस पर संवेदनहीनता का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि घटना स्थल भले ही मधुबनी के सकरी थाना क्षेत्र में था. लेकिन वहां से सकरी थाना 15 किमी, जबकि दरभंगा जिले का रैयाम थाना महज आधा किमी दूर था.
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गोली मारे जाने के बाद लोग इस उम्मीद से रैयाम थाना गए कि पुलिस घायल को अस्पताल ले जाएगी. लेकिन रैयाम थाना पुलिस ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मामला सकरी थाना का है. आखिरकार, घायल ने अस्पताल पहुंचने के पहले ही दम तोड़ दिया. उसके बाद जब लोग रैयाम थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, तो पुलिस ने उनके ऊपर मुकदमा कर उन्हें जेल भेज दिया. उन्होंने कहा कि यह पुलिस का अमानवीय चेहरा है. उन्होंने इसके खिलाफ दरभंगा डीएम और एसएसपी से शिकायत की है.