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मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल मामले में हुई सुनवाई.. राज्य सरकार से 3 सप्ताह में मांगा जवाब - Muzaffarpur Eye Hospital Case

मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल मामले की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने 3 सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है. पढ़ें पूरी खबर

Patna High Court
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Published : Aug 24, 2022, 11:06 PM IST

पटनाः मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन (Muzaffarpur Eye Hospital Case ) में कई व्यक्तियों के आंख की रोशनी खो जाने के मामले पर बुधवार को पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई(Hearing In Patna High Court ) की. चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 3 सप्ताह की मोहलत दी है.

पढ़ें-मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल प्रकरण: SSP ने ऑपरेशन थिएटर पहुंचकर की छानबीन, सुरक्षाकर्मियों से की पूछताछ

ठोस कार्रवाई की मांगः कोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्वास्थ्य सेवा के निदेशक प्रमुख और सिविल सर्जन मुजफ्फरपुर द्वारा हलफनामा नहीं दायर करने को गंभीरता से लिया था.पूर्व की सुनवाई में मुजफ्फरपुर के एसएसपी को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिया था. मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वी के सिंह ने कोर्ट को बताया था कि इस मामलें में दर्ज प्राथमिकी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है.


हॉस्पिटल को बंद करने का है आदेशः कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में कहा था कि इस मामलें में गठित डॉक्टरों की कमिटी को चार सप्ताह मे अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करें. इसमें कोर्ट को बताया गया था कि आंखों की रोशनी गवांने वाले पीड़ितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं. साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया था,लेकिन अब तक दर्ज प्राथमिकी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
आई हॉस्पिटल के प्रबंधन पर है गंभीर आरोपः याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपनी आँखें की रोशनी खोनी पड़ी. याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी ऑंखें गंवानी पड़ी.इस मामले पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह के फिर सुनवाई की जाएगी.
पढ़ें-पटना हाईकोर्ट में मुजफ्फरपुर मोतियाबिंद कांड पर सुनवाई, CS का हलफनामा असंतोषजनक, स्वास्थ्य विभाग को ये निर्देश

पटनाः मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन (Muzaffarpur Eye Hospital Case ) में कई व्यक्तियों के आंख की रोशनी खो जाने के मामले पर बुधवार को पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई(Hearing In Patna High Court ) की. चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को जवाब देने के लिए 3 सप्ताह की मोहलत दी है.

पढ़ें-मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल प्रकरण: SSP ने ऑपरेशन थिएटर पहुंचकर की छानबीन, सुरक्षाकर्मियों से की पूछताछ

ठोस कार्रवाई की मांगः कोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्वास्थ्य सेवा के निदेशक प्रमुख और सिविल सर्जन मुजफ्फरपुर द्वारा हलफनामा नहीं दायर करने को गंभीरता से लिया था.पूर्व की सुनवाई में मुजफ्फरपुर के एसएसपी को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कोर्ट ने निर्देश दिया था. मुकेश कुमार ने ये जनहित याचिका दायर की है. पूर्व की सुनवाई में कोर्ट के समक्ष याचिकाकर्ता के अधिवक्ता वी के सिंह ने कोर्ट को बताया था कि इस मामलें में दर्ज प्राथमिकी पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है.


हॉस्पिटल को बंद करने का है आदेशः कोर्ट ने इससे पहले की सुनवाई में कहा था कि इस मामलें में गठित डॉक्टरों की कमिटी को चार सप्ताह मे अपना रिपोर्ट प्रस्तुत करें. इसमें कोर्ट को बताया गया था कि आंखों की रोशनी गवांने वाले पीड़ितों को बतौर क्षतिपूर्ति एक एक लाख रुपए दिए गए हैं. साथ ही मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल को बंद करके एफ आई आर दर्ज कराया गया था,लेकिन अब तक दर्ज प्राथमिकी पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई.
आई हॉस्पिटल के प्रबंधन पर है गंभीर आरोपः याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विजय कुमार सिंह ने आरोप लगाया गया है कि कथित तौर पर आई हॉस्पिटल के प्रबंधन व राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा बरती गई अनियमितता और गैर कानूनी कार्यों की वजह से कई व्यक्तियों को अपनी आँखें की रोशनी खोनी पड़ी. याचिका में आगे यह भी कहा गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों व अस्पताल प्रबंधन के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज करनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं की लापरवाही की वजह से सैकड़ों लोगों को अपनी ऑंखें गंवानी पड़ी.इस मामले पर अगली सुनवाई तीन सप्ताह के फिर सुनवाई की जाएगी.
पढ़ें-पटना हाईकोर्ट में मुजफ्फरपुर मोतियाबिंद कांड पर सुनवाई, CS का हलफनामा असंतोषजनक, स्वास्थ्य विभाग को ये निर्देश

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