कोरबा: हसदेव नदी पर बने छत्तीसगढ़ के सबसे उंचे मिनीमाता बांगो बांध के विस्थापित मछुआरों ने जल आंदोलन की शुरुआत की है. गुरुवार को बांगो में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन की अगुवाई आदिवासी समुदाय से आने वाले विस्थापित परिवार सहित बुद्धिजीवियों ने की. सम्मेलन में ठेका व्यवस्था निरस्त कर विस्थापितों की समितियों को मछली पकड़ने का कानूनी अधिकार देने की मांग उठी. सम्मेलन में शामिल लोगों का कहना था कि चार दशक पहले बांगो बांध के निर्माण से विस्थापित मछुआरों की आमदनी बढ़े इस पर काम हो. विस्थापित परिवारों से बांध में मछली पकड़ने के अधिकार को ना छीना जाए.
बांगों बांध के विस्थापितों की मांग: जल अधिकार आंदोलन के सम्मेलन में बांगो बांध से प्रभावित आदिवासी और मछुआरा परिवार बड़ी तादाद में जमा हुए. चार दशक पूर्व बने मिनीमाता बांगो बांध से प्रभावित 52 गांव के प्रभावित आदिवासी, मछुआरे समुदाय ने एतमानगर में विशाल सम्मेलन आयोजित कर बांध की ठेका प्रणाली तत्काल निरस्त करने की मांग की.
ग्रामीणों ने विस्थापितों की मछुआरा समितियों को केज की व्यवस्था कर स्वतंत्र रूप से मछली पकड़ने की मांग रखी. सम्मलेन में छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष, पूर्व विधायक जनकलाल ठाकुर, कार्यकर्ता समिति से रमाकांत बंजारे, हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति से रामलाल करियाम, मुनेश्वर पोर्ते, पूर्व सरपंच हृदय तिग्गा, ऋषिकांत चौधरी बिलासपुर से रामसागर निषाद शामिल हुए.
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जल अधिकार आंदोलन: जल अधिकार सम्मलेन को संबोधित करते हुए छतराम धनवार ने कहा कि ''बांध में हमारी पुरखों की जमीन, जंगल, देवी देवता सब कुछ खत्म हो गए. पूर्ण रूप से 52 गांव विस्थापित हुए लेकिन किसी भी व्यक्ति को रोजगार नहीं मिला. वैकल्पिक रोजगार के लिए रेशम, कुक्कुट पालन की व्यवस्था की गई जो कुछ वर्षों में ही बंद हो गई. ग्रामीण बांध से मछली मारकर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे. लेकिन बांध को बड़े व्यवसायियों को ठेका पर दे दिया गया जिससे अब रोजी रोटी का एकमात्र साधन भी छिन गया''.
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''पानी पर अधिकार नहीं छोड़ेंगे'': फिरतू बिंझवार ने कहा कि ''हमारे सामने आजीविका का गंभीर संकट है. जंगल से वन विभाग भगता है और पानी से ठेकेदार. सब कुछ छfन जाने के बाद बांध का जलाशय ही हमारी आजीविका का एकमात्र साधन है. हम किसी भी कीमत पर पानी पर अपने अधिकार को नहीं छोड़ेंगे, मछली पकड़ने का अधिकार भी हासिल करेंगे''.
अधिकार के लिए लड़ाई: छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के आलोक शुक्ला ने कहा कि ''विकास के नाम पर आज से चालीस वर्ष पूर्व जिनका सब कुछ छीन लिया गया वह आज भी वैकल्पिक रोजगार और जीवन यापन के मूलभूत अधिकार से वंचित हैं. चंद राजस्व के नाम पर स्थानीय आदिवासी मछुआरा समुदाय से मछली पकड़ने का अधिकार छीनकर ठेकदारों को सौंप देना अन्याय है''. आलोक शुक्ला ने कहा कि जिस बागो बांध के पानी से जांजगीर, चांपा, कोरबा, बिलासपुर में समृद्धि आई उसी बांध प्रभावित 52 गांव के हजारों लाखों लोगों के सामने आज भी रोजी रोटी का संकट है. आलोक शुक्ला ने कहा कि पानी पर प्राथमिक अधिकार विस्थापितों का है. जिसके क्षेत्र में मछली पकड़ने का अधिकार भी सबसे पहले उनका ही है.