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लाड़ली बहना योजना के जनक शिवराज बोले, 'कई बार करने पड़ते हैं वोट दिलाऊ फैसले' - SHIVRAJ ONE NATION ONE ELECTION

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान भोपाल के ओरिएंटल इंस्टीट्यूट पहुंचे. यहां उन्होंने छात्रों को वन नेशन वन इलेक्शन की खूबियां बताई.

SHIVRAJ ONE NATION ONE ELECTION
वन नेशन वन इलेक्शन के लिए शिवराज का फार्मूला (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : Feb 27, 2025, 6:12 PM IST

Updated : Feb 27, 2025, 8:55 PM IST

भोपाल: केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि "मैं चाहता हूं कि, स्टूडेंट फॉर वन नेशन, वन इलेक्शन एक फोरम बनना चाहिए. इस फोरम को स्टूडेंट्स खुद बनाएं. एक राष्ट्र, एक चुनाव, एक जन-अभियान बनें, एक ऐसा आंदोलन बने कि जिस अभियान की अगुवाई स्टूडेंट ही करें. सोशल मीडिया पर भी ये अभियान चले. वन नेशन वन इलेक्शन के बारे में बात करते वक्त केंद्रीय मंत्री ने यहां तक कहा कि कई बार तो वोट दिलाऊ फैसले तक करने पड़ जाते हैं." शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को भोपाल स्थित ओरिएंटल इंस्टीट्यूट में छात्र-छात्राओं को वन नेशन, वन इलेक्शन विषय पर संबोधित कर रहे थे.

छात्र बनाएं वन नेशन वन इलेक्शन फोरम

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि "वन वन, स्टूडेंट फॉर वन नेशन, वन इलेक्शन एक फोरम बनाया जाना चाहिए और इस फोरम को स्टूडेंट्स खुद बनाएं. एक राष्ट्र, एक चुनाव को एक जन-अभियान की शक्ल देना चाहिए. जिसका नेतृत्व भी छात्र ही करें. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी एक अभियान चले और इस देश से एक आवाज बुलंद हो कि, हम एक राष्ट्र, एक चुनाव के पक्ष में खड़े हैं. हम इस अभियान का समर्थन करते हैं. जनता के दबाव में हम विवश कर दें सभी राजनीतिक दलों कि धन और समय की बर्बादी नहीं होने देंगे, विकास के काम ठप्प नहीं होने देंगे. देश की प्रगति और विकास में बार-बार होने वाले चुनाव को बाधा नहीं बनने देंगे."

शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान (ETV Bharat)

बोले शिवराज पांच साल बारह महीने चुनाव की तैयारी

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, "हमारे देश में कुछ हो या ना हो पांच साल, 12 महीने चुनाव की तैयारियां जरूर चलती है. ये बार-बार होने वाले चुनाव देश की प्रगति और विकास में बाधा है. इसलिए संविधान में संशोधन कर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए. इसलिए देश में एक बार और एक साथ चुनाव होने चाहिए. अब समय आ गया है कि, देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं."

1967 तक होते थे एक साथ चुनाव

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, "वर्ष 1967 में भी हमारे देश में एक साथ चुनाव होते थे. पहले बैलेट पेपर से चुनाव होते थे, फिर बैलेट पेपर पर मुहर लगाई जाती थी और अब ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराए जाते हैं. शिवराज सिंह ने कहा कि, तत्कालीन केंद्र सरकार ने राज्यों में दूसरे दलों की सरकार बनने पर अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग कर विधानसभाएं भंग करना शुरू कर दिया और तब से एक साथ चुनाव बंद हो गए. लोकसभा और विधानसभा के चुनाव अलग-अलग होने लगे.

शिवराज ने छात्रों को किया संबोधित (ETV Bharat)

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि, देश के चुनाव आयोग ने 1983 में सबसे पहले कहा कि, देश में एक बार, एक साथ चुनाव होना चाहिए. फिर वर्ष 1999 में विधि आयोग ने भी यही कहा कि, देश में एक साथ चुनाव हो. देश के न्यायधीश, मुख्य न्यायधीश, पूर्व चुनाव आयुक्त और अनेक विचारशील लोगों ने इस बहस को आगे बढ़ाकर एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया था."

देश में हर 6 महीने में कही ना कहीं हो जाते हैं चुनाव

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, "हमेशा होने वाले चुनाव देश की प्रगति और विकास में बाधक है. पिछले साल नवंबर-दिसंबर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए. उसके चार माह बाद देश में लोकसभा चुनाव हुए. इसके बाद हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड में चुनाव हुए. ये चुनाव खत्म हुए नहीं कि, दिल्ली का दंगल शुरू हो गया और अब सभी राजनीतिक दल और नेता बिहार चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं.

हमारे देश में हर 6 माह में कहीं न कहीं चुनाव होते हैं. ये बार-बार होने वाले चुनाव में बड़ी मात्रा में धन खर्च होता है. सुरक्षा बल और अधिकारी-कर्मचारी भी चुनाव कराने एक राज्य से दूसरे राज्यों में जाते हैं. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री और राज्य के मंत्रीगणों का भी समय खराब होता है. लॉन्ग टर्म प्लानिंग और विकास के सभी काम ठप्प हो जाते हैं. अगर देश में एक साथ चुनाव होंगे तो बाकी साढ़े चार साल सरकारें केवल विकास के काम में जुट सकती है. इसलिए संविधान में संशोधन कर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने चाहिए."

भोपाल: केन्द्रीय कृषि और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि "मैं चाहता हूं कि, स्टूडेंट फॉर वन नेशन, वन इलेक्शन एक फोरम बनना चाहिए. इस फोरम को स्टूडेंट्स खुद बनाएं. एक राष्ट्र, एक चुनाव, एक जन-अभियान बनें, एक ऐसा आंदोलन बने कि जिस अभियान की अगुवाई स्टूडेंट ही करें. सोशल मीडिया पर भी ये अभियान चले. वन नेशन वन इलेक्शन के बारे में बात करते वक्त केंद्रीय मंत्री ने यहां तक कहा कि कई बार तो वोट दिलाऊ फैसले तक करने पड़ जाते हैं." शिवराज सिंह चौहान शुक्रवार को भोपाल स्थित ओरिएंटल इंस्टीट्यूट में छात्र-छात्राओं को वन नेशन, वन इलेक्शन विषय पर संबोधित कर रहे थे.

छात्र बनाएं वन नेशन वन इलेक्शन फोरम

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि "वन वन, स्टूडेंट फॉर वन नेशन, वन इलेक्शन एक फोरम बनाया जाना चाहिए और इस फोरम को स्टूडेंट्स खुद बनाएं. एक राष्ट्र, एक चुनाव को एक जन-अभियान की शक्ल देना चाहिए. जिसका नेतृत्व भी छात्र ही करें. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर भी एक अभियान चले और इस देश से एक आवाज बुलंद हो कि, हम एक राष्ट्र, एक चुनाव के पक्ष में खड़े हैं. हम इस अभियान का समर्थन करते हैं. जनता के दबाव में हम विवश कर दें सभी राजनीतिक दलों कि धन और समय की बर्बादी नहीं होने देंगे, विकास के काम ठप्प नहीं होने देंगे. देश की प्रगति और विकास में बार-बार होने वाले चुनाव को बाधा नहीं बनने देंगे."

शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान (ETV Bharat)

बोले शिवराज पांच साल बारह महीने चुनाव की तैयारी

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, "हमारे देश में कुछ हो या ना हो पांच साल, 12 महीने चुनाव की तैयारियां जरूर चलती है. ये बार-बार होने वाले चुनाव देश की प्रगति और विकास में बाधा है. इसलिए संविधान में संशोधन कर लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ होने चाहिए. इसलिए देश में एक बार और एक साथ चुनाव होने चाहिए. अब समय आ गया है कि, देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एक साथ कराए जाएं."

1967 तक होते थे एक साथ चुनाव

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, "वर्ष 1967 में भी हमारे देश में एक साथ चुनाव होते थे. पहले बैलेट पेपर से चुनाव होते थे, फिर बैलेट पेपर पर मुहर लगाई जाती थी और अब ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराए जाते हैं. शिवराज सिंह ने कहा कि, तत्कालीन केंद्र सरकार ने राज्यों में दूसरे दलों की सरकार बनने पर अनुच्छेद 356 का दुरुपयोग कर विधानसभाएं भंग करना शुरू कर दिया और तब से एक साथ चुनाव बंद हो गए. लोकसभा और विधानसभा के चुनाव अलग-अलग होने लगे.

शिवराज ने छात्रों को किया संबोधित (ETV Bharat)

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि, देश के चुनाव आयोग ने 1983 में सबसे पहले कहा कि, देश में एक बार, एक साथ चुनाव होना चाहिए. फिर वर्ष 1999 में विधि आयोग ने भी यही कहा कि, देश में एक साथ चुनाव हो. देश के न्यायधीश, मुख्य न्यायधीश, पूर्व चुनाव आयुक्त और अनेक विचारशील लोगों ने इस बहस को आगे बढ़ाकर एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया था."

देश में हर 6 महीने में कही ना कहीं हो जाते हैं चुनाव

केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, "हमेशा होने वाले चुनाव देश की प्रगति और विकास में बाधक है. पिछले साल नवंबर-दिसंबर में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में विधानसभा चुनाव हुए. उसके चार माह बाद देश में लोकसभा चुनाव हुए. इसके बाद हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड में चुनाव हुए. ये चुनाव खत्म हुए नहीं कि, दिल्ली का दंगल शुरू हो गया और अब सभी राजनीतिक दल और नेता बिहार चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं.

हमारे देश में हर 6 माह में कहीं न कहीं चुनाव होते हैं. ये बार-बार होने वाले चुनाव में बड़ी मात्रा में धन खर्च होता है. सुरक्षा बल और अधिकारी-कर्मचारी भी चुनाव कराने एक राज्य से दूसरे राज्यों में जाते हैं. प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केन्द्रीय मंत्री और राज्य के मंत्रीगणों का भी समय खराब होता है. लॉन्ग टर्म प्लानिंग और विकास के सभी काम ठप्प हो जाते हैं. अगर देश में एक साथ चुनाव होंगे तो बाकी साढ़े चार साल सरकारें केवल विकास के काम में जुट सकती है. इसलिए संविधान में संशोधन कर देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होने चाहिए."

Last Updated : Feb 27, 2025, 8:55 PM IST
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