नई दिल्ली: दिल्ली विधानसभा सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को दोपहर के बाद विधानसभा उपाध्यक्ष का चुनाव हुआ. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भाजपा के वरिष्ठ विधायक मोहन सिंह बिष्ट के नाम का प्रस्ताव विधानसभा उपाध्यक्ष के लिए रखा. इसके बाद कैबिनेट मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा सहित सदन में मौजूद भाजपा के सभी सदस्यों ने इसका समर्थन किया, जिससे प्रस्ताव सर्वसम्मति पारित हो गया. उसके बाद बिष्ट को दिल्ली विधानसभा का उपाध्यक्ष घोषित किया गया.
विधानसभा उपाध्यक्ष चुने जाने के बाद मोहन सिंह बिष्ट ने कहा; ''मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विजन सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास की नीति पर चलते हुए सदन में काम करूंगा.''विधानसभा उपाध्यक्ष के रूप में मंचासीन होने के बाद मोहन बिष्ट ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार को दोपहर 2 बजे तक स्थगित करने की घोषणा की. विधानसभा उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट ने आसन ग्रहण करने के बाद कहा; ''मैं सदन के सभी सदस्यों का आभार प्रकट करता हूं, जिन्होंने मुझे इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी के लिए चुना है. मैं निश्चित रूप से उनके विश्वास पर खरा उतरने की कोशिश करूंगा.
#WATCH | After being elected as Deputy Speaker of the Delhi Assembly, Mohan Singh Bisht said, " i will try my best to meet the expectations and the faith expressed in me by the party. i thank narendra modi ji, jp nadda ji, cm and cabinet members..."
— ANI (@ANI) February 27, 2025
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बता दें कि जिस प्रकार बुधवार को दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय की ओर से तय की गई कार्यसूची के अनुसार, बिष्ट को डिप्टी स्पीकर पद पर निर्वाचित करने के लिए दो अलग-अलग प्रस्ताव पेश किए गए. पहला प्रस्ताव मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की ओर से पेश किया गया और पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा की ओर से इसका समर्थन किया गया. जबकि दूसरा प्रस्ताव विधायक आरके पुरम विधानसभा क्षेत्र के विधायक अनिल कुमार शर्मा की ओर से प्रस्तावित किया और गजेंद्र सिंह यादव की ओर से इसका समर्थन किया गया. बता दें कि मोहन सिंह बिष्ट दिल्ली की आठवीं विधानसभा में सबसे वरिष्ठ विधायक हैं.
मोहन बिष्ट को पहली बार मिला ये मौका: पांच चुनाव जीतने के बाद अब छठे चुनाव के दौरान दिल्ली विधानसभा में ऐसा पहली बार होगा, जब मोहन बिष्ट विधायक रहते हुए सत्ता पक्ष की ओर से उन्हें कोई संवैधानिक पद दिया गया है. इससे पहले मोहन सिंह बिष्ट के विधायक के रूप में पांच कार्यकाल विपक्ष में बैठते हुए ही निकल गए, क्योंकि उन दिनों कांग्रेस और आम आदमी पार्टी सरकार रही. भाजपा को सरकार बनाने का मौका नहीं मिला था.
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कद्दावर नेता मोहन सिंह बिष्ट: दिल्ली की सियासत में मोहन सिंह बिष्ट को कद्दावर नेता माना जाता है. 1998 में पहली बार करावल नगर से मोहन सिंह बिष्ट विधायक चुने गए. 2003, 2008 और 2013 में भी विधानसभा चुनाव में भी मोहन सिंह बिष्ट ने करावल नगर से जीत का परचम लहराया. 2015 में मोहन सिंह बिष्ट को हार का सामना करना पड़ा. आम आदमी पार्टी प्रत्याशी कपिल मिश्रा ने करावल नगर से 2015 में जीत दर्ज की. 2020 में करावल नगर सीट से मोहन सिंह बिष्ट फिर विधायक बने. 2025 के विधानसभा चुनाव में मोहन सिंह बिष्ट को बीजेपी ने मुस्तफाबाद सीट से टिकट दिया. मुस्तफाबाद से मोहन सिंह बिष्ट ने रिकॉर्ड वोटो से जीत दर्ज की.
उत्तराखंड के हैं मोहन सिंह बिष्ट: मोहन सिंह बिष्ट मूल रूप से उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के रहने वाले हैं. 1970 के दशक में बिष्ट का परिवार दिल्ली आ गया था. दिल्ली आने के बाद मोहन सिंह बिष्ट भारतीय जनसंघ में शामिल हो गए. 1992 में मोहन सिंह बिष्ट राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में स्वयंसेवक बने.
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