लखनऊ: गंगा यमुना के दोआब में बसा देश का सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश अपने गठन के 75 साल पूरे कर रहा है. वैदिक काल से लेकर वर्तमान तक यूपी अपनी उर्वरा भूमि और उत्कृष्ट मानसिकता वाले व्यक्तित्वों की वजह से देश के लिए धुरी बना रहा है. विश्व में सिर्फ राष्ट्र चीन, स्वयं भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, इंडोनिशिया और ब्राजील की जनसंख्या उत्तर प्रदेश की जनसंख्या से अधिक है. उत्तर प्रदेश का गठन 24 जनवरी 1950 को हुआ था. वर्तमान में 75 जिलों वाला सबसे बड़ा राज्य है. आइए जानते हैं कि यूपी का 'हीरक' इतिहास कैसा रहा है.
1935 तक यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध नाम थाः दिवंगत इतिहासकार योगेश प्रवीण 'उत्तर प्रदेश की यात्रा' में लिखते हैं कि प्रदेश का इतिहास लगभग 4,000 साल पुराना है. उत्तर प्रदेश में सबसे पहले आर्यों का निवास था. आर्यों ने इस क्षेत्र में वैदिक सभ्यता की नींव रखी. आर्यों के समय में ही महाभारत, रामायण, ब्राह्मण, और पुराणों जैसे महाकाव्यों की रचना हुई.
उत्तर प्रदेश में मौर्य, गुप्त, यदुवंश, और कुषाण जैसे साम्राज्यों का शासन रहा है. मुगल साम्राज्य के अवशेषों में ताजमहल, फतेहपुर सीकरी, इलाहाबाद किला, और आगरा किला जैसे स्मारक शामिल हैं. 1857 के भारतीय विद्रोह में झांसी, मेरठ, कानपुर, और लखनऊ में विद्रोह हुए थे. 1935 तक प्रांत का नाम यूनाइटेड प्रोविंस ऑफ आगरा एंड अवध था. बाद में इसको छोटा कर के यूनाइटेड प्रोविंस कर दिया गया. 1947 में आजादी के बाद 24 जनवरी 1950 में यूनाइटेड प्रोविंस का नाम बदलकर उत्तर प्रदेश कर दिया गया. साल 2000 में उत्तर प्रदेश से अलग होकर उत्तराखंड राज्य का निर्माण हुआ.
ऐसे शुरू हुआ यूपी दिवस का आयोजनः साल 2018 तक यूपी दिवस का आयोजन नहीं होता था. जब राम नाईक यहां राज्यपाल बन कर आए तो उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यूपी दिवस मनाए जाने की सलाह दी. राम नाईक ने कहा कि 24 जनवरी को मुंबई में यह दिवस मनाया जाता है तो यूपी क्यों नहीं मनाता है. जिसके बाद पिछले सात साल से यूपी दिवस लगातार मनाया जा रहा है.
लगभग 50 सालों तक पिछड़ता रहाः गौरतलब है कि राज्य गठन के बाद राजनीतिक दृष्टिकोण को छोड़ दिया जाए तो यूपी लंबे समय तक देश की मुख्यधारा में शामिल होने को लेकर पिछड़ता रहा. यह सिलसिला पिछली शताब्दी के समाप्त होने तक बना रहा. इस सदी के आने के बाद यूपी ने देश के साथ कंधे से कंधा मिलाना शुरू कर दिया. कभी टॉप टेन से बाहर रहने वाले प्रदेश ने अब तीसरा पायदान हासिल कर लिया है. यूपी की प्रति व्यक्ति आय इस वक्त एक लाख रुपये सालाना के करीब हो चुकी है. यूपी के एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचने में जहां अब से करीब 15 साल पहले सड़क मार्ग से 24 घंटे का समय लगता था, वह अब 11 घंटे से भी कम हो गया है. पश्चिम के आखिरी जिले नोएडा से पूर्व में बिहार की सीमा तक गाजीपुर का सफर अब मात्र 11 घंटे में तय हो जाता है.
सुधार की अभी जरूरतः यूपी पलायन, अव्यवस्था, संगठित अपराध और अशिक्षा जैसे बिंदुओं हर वर्ष सुधार कर रहा है. इसके बावजूद स्वास्थ्य, रोजगार और सरकारी भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर अभी भी सुधार की जरूरत है. कानपुर को दक्षिण एशिया का मानचेस्टर कहा जाता था. यहां लाल इमली, जेके जूट मिल, लोहिया मोटर्स के अलावा अनेक कारखाने विकसित किए गए मगर समय के साथ मजदूर आंदोलनों की भेंट चढ़ गए. कानपुर इससे उबर नहीं सका. इसके अलावा यूपी के लगभग प्रत्येक जिले में एक हस्तशिल्प जरूर मशहूर रहा. मगर उसकी वास्तविक ब्रांडिंग पिछले आठ साल में शुरू हुई है.
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासतों की स्थिति: आजादी के बाद की जाए तो यूपी अपनी समृध्द परंपराओं को लेकर हमेशा ही विश्व विख्यात रहा. काशी विश्वनाथ, मथुरा वृंदावन, अयोध्या, प्रयागराज और यहां होने वाले कुंभ मेले, चित्रकूट धाम इसके अलावा अनेक देवी स्थलों के अलावा मुगल कालीन स्मारकों ने भी हमेशा से दुनिया भर के पर्यटकों का ध्यान यूपी की ओर खूब खींचा. प्रदेश की ऐतिहासिक धरोहर, जैसे वाराणसी, आगरा, लखनऊ, प्रयागराज, अयोध्या, मथुरा और अन्य महत्वपूर्ण स्थल हैं. समय के साथ यूपी के महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों और शहर में चौमुखी विकास हुआ है.
अयोध्या राम मंदिरः बता दें कि रामजन्म भूमि का विवाद 2019 में सुप्रीम कोर्ट से हल होने के बाद भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है. 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की विश्वभर में ख्याति मिली है. इतना ही नहीं पूरे रामगनरी की भी कायापलट हो गई है. यहां एयरपोर्ट से पिछले साल से लगातार उड़ाने जारी हैं. अयोध्या देश दुनिया से जुड़ गया है.
राजनीतिक दबदबा: आजादी के बाद से ही लगातार यूपी का राजनीति में दबदबा रहा. हमेशा से ही एक कहावत रही है कि दिल्ली जाने का रास्ता यूपी से ही निकलता है. यहां लोकसभा की 80 सीटें हैं. यहां बहुमत पाने वाले की दिल्ली साख होती है. जिसका उदाहरण 2024 का लोकसभा चुनाव है, जब बीजेपी की सीटें कम हुईं तो उसका पूर्ण बहुमत नहीं आया. बीजेपी के वरिष्ठ नेता और प्रदेश प्रवक्ता हरीश चंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि निश्चित तौर पर यूपी का राजनीतिक दबदबा है, जो कि बढ़ता गया. इसके साथ ही यूपी भी बढ़ रहा है.
यूपी के कद्दावर नेताः यूपी से जुड़े जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी, चौधरी चरण सिंह, राजीव गांधी, विश्वनाथ प्रताप सिंह, चंद्रशेखर, अटल बिहारी बाजपेई और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जुड़ाव यूपी से रहा. या तो यूपी इनकी जन्मभूमि रहा या फिर कर्मभूमि. यह सिलसिला आजादी के बाद से लगातार चल रहा है.
काशी-मथुरा की बदली तस्वीरः कान्हानगरी वृंदावन में समय समय पर अलग अलग सरकारों ने विकास कार्य करवाए हैं. सबसे बड़ा अंतर सपा सरकार में तब पड़ा जब यमुना और आगरा एक्सप्रेस वे बन गए. इनके बनने से देश भर से लोगों को यहां पहुंचना आसान हो गया है. इसके अतिरिक्त योगी सरकार ने अलग से मथुरा बृज क्षेत्र विकास बोर्ड का गठन किया है. जिससे यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. काशी विश्वनाथ काशी संसार की सबसे प्राचीन आबाद नगरी है. काशी विश्वनाथ धाम 12 ज्योर्तिलिंगों में से एक है. हमेशा से ही यहां दुनिया भर से बाबा विश्वनाथ के भक्त आते रहे हैं. सबसे सकारात्मक बदलाव साल 2014 के बाद हुआ, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां से सांसद चुने गए. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने नजारा बदल दिया है. एक साल में दो करोड़ अधिक लोग वाराणसी पहुंच रहे हैं.
पर्यटन विकास में बढ़ते कदम: पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह बताते हैं कि प्रदेश में पर्यटकों का रुझान उत्तर प्रदेश की ओर लगातार बढ़ रहा है. भगवान राम और कृष्ण की जन्म भूमि, अयोध्या, ब्रज क्षेत्र और भगवान शिव की काशी का महत्वपूर्ण रोल है. सात वर्षों में यूपी में करीब 200 करोड़ से अधिक पर्यटक पहुंचे हैं.इसमें 1.26 करोड़ विदेशी पर्यटक भी शामिल हैं. उत्तर प्रदेश अब पर्यटकों की पसंदीदा जगह है. पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2022 में यूपी में आने वाले पर्यटकों की संख्या 32.18 करोड़ थी. 2024 की समाप्ति तक यह बढ़कर लगभग 65 करोड़ तक पहुंच गई. इसमें अयोध्या और काशी का खास योगदान रहा.
तस्वीर बदलने वाली योजनाएं : पिछले करीब 15 साल में सराकारी योजनाओं की दृष्टि में यूपी का स्वरूप खास बदला हुआ नजर आता है. जिसमें बसपा, सपा और भाजपा तीनों सरकारों में काफी काम हुए. यूपी में एक्सप्रेस वे का अब एक पूरा जाल बिछाया जा रहा है. साल 2010 में यह सिलसिला 165 किमी के यमुना एक्सप्रेस वे से शुरू हुआ था. जिसके बाद करीब 300 किमी का लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे सपा सरकार में बना. योगी सरकार आने के बाद लखनऊ से गाजीपुर के बीच 340 किमी का पूर्वांचल एक्सप्रेस बनाया गया. प्रयागराज से मेरठ के बीच देश का दूसरा सबसे लंबा करीब 600 किमी के गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण जारी है. लगभग सवा दो सौ किमी के बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेस वे, कानपुर लखनऊ एक्सप्रेस वे निर्माणधीन हैं. सबसे ज्यादा एयरपोर्ट और मेट्रो रेल परियोजना वाला राज्य यूपी बन गया. प्रदेश में वर्तमान में 21 एयरपोर्ट हैं. लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ में संचालित है. दिल्ली मेरठ रैपिड रेल शुरू हो चुकी है. गोरखपुर और वाराणसी में प्रस्तावित है.
खेलों में प्रदेश की उपलब्धियां : पश्चिम उत्तर प्रदेश को छोड़ दिया जाए तो बाकी राज्य खेलों के क्षेत्र में अब तक कुछ खास आगे नहीं बढ़ सका है. साल 2023 में हुए नेशनल गेम्स में यूपी का स्थान 15 वां रहा है. ओलंपिक में खेले जाने वाले खिलाड़ियों की बात करें तो यूपी के पास काफी सीमित कामयाबियां हैं. पिछले कुछ ओलंपिक्स में यूपी का प्रतिनिधित्व बढ़ा है. इस बार वाराणसी के ललित उपाध्याय और राजकुमार पाल कांस्य पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य रहे हैं. क्रिकेट में यूपी पिछले करीब 20 25 साल से बड़े क्रिकेटर देता रहा है. मो कैफ, आरपी सिंह,मो कैफ, आरप सिंह, सुरेश रैना, पीयूष चावला, प्रवीण कुमार, कुलदीप यादव जैसे क्रिकेटर यूपी के सितारे रहे हैं. उत्तर प्रदेश के खेल निदेशक आरपी सिंह बताते हैं कि निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश खेलों की दिशा में काफी आगे बढ़ गया है. समय-समय पर प्रत्येक खेल में अच्छे खिलाड़ी सामने आ रहे हैं. खेल सुविधाओं में भी बढ़ोतरी हो रही है. मेरी खिलाड़ियों से अपील है कि खेलों में भाग लें. बहुत अच्छा भविष्य उत्तर प्रदेश में है.