ETV Bharat / state

कानपुर में आंखों की बीमारी का होगा सटीक इलाज, GSVM मेडिकल काॅलेज में आई ये खास मशीन - KANPUR NEWS

अस्पताल परिसर में बने सुपर स्पेशलिटी विंग में रखवाई गई क्लेरा मशीन.

GSVM मेडिकल काॅलेज में आई खास मशीन
GSVM मेडिकल काॅलेज में आई खास मशीन (Photo credit: ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team

Published : Feb 27, 2025, 5:50 PM IST

कानपुर : शहर के सबसे बड़े सरकारी हैलट अस्पताल में कुछ दिनों पहले ही त्वचा रोग विभाग में इलेक्ट्रोकॉटरी मशीन से मरीजों के शरीर से तिल और मस्से हटाने का इलाज शुरू हुआ. इसके बाद अब यहां के नेत्र रोग विभाग में एक रुपये के सरकारी पर्चे पर एक करोड़ रुपये की लागत वाली क्लेरा मशीन से मरीज अपना इलाज करा सकेंगे. हालांकि, इस मशीन का लाभ उन मरीजों को मिलेगा जिन्हें रेटिना से संबंधित दिक्कतें होती हैं. फिलहाल मशीन को अस्पताल परिसर में बने सुपर स्पेशलिटी विंग में रखवाया गया और यहां मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डा. संजय काला ने दी जानकारी (Video credit: ETV Bharat)

अब पूरे पर्दे की होगी स्क्रीनिंग : जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डा. संजय काला ने दावा किया है कि रेटिना संबंधी दिक्कतों को दूर करने के मामले में क्लेरा अभी तक की सबसे एडवांस्ड मशीन है. इस मशीन को पूरे सूबे में केवल कानपुर के सरकारी अस्पताल में उपयोग किया जा रहा है. उन्होंने बताया, कि अभी तक चिकित्सक ऑप्थलमस्कोप की मदद से जब आंखों का इलाज करते थे तो केवल एक हिस्सा ही दिख पाता था. मगर, क्लेरा मशीन की मदद से वह आंखों का पूरा पर्दा देख सकेंगे. इसमें अंदरूनी नसों की पूरी जानकारी मिल जाएगी, फिर जो फ्लोरोसेंट डाई का उपयोग दवा के तौर पर किया जाता है, उसे भी चोट या संक्रमित हिस्से तक पहुंचाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि क्लेरा मशीन से आंखों का परीक्षण बेहद आसान होगा.


इन बातों को भी जानिए : शहर के एलएलआर अस्पताल में ओपीडी का पर्चा केवल एक रुपये में बनता है. एक दिन में नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में औसतन 100 मरीज पहुंचते हैं. जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज को हाइट्स की ओर से क्लेरा मशीन दी गई है

यह भी पढ़ें : हैलट के डॉक्टरों ने पहली बार बिना चीरा किया अग्नाशय की गांठ का इलाज - HALLETT HOSPITAL KANPUR

कानपुर : शहर के सबसे बड़े सरकारी हैलट अस्पताल में कुछ दिनों पहले ही त्वचा रोग विभाग में इलेक्ट्रोकॉटरी मशीन से मरीजों के शरीर से तिल और मस्से हटाने का इलाज शुरू हुआ. इसके बाद अब यहां के नेत्र रोग विभाग में एक रुपये के सरकारी पर्चे पर एक करोड़ रुपये की लागत वाली क्लेरा मशीन से मरीज अपना इलाज करा सकेंगे. हालांकि, इस मशीन का लाभ उन मरीजों को मिलेगा जिन्हें रेटिना से संबंधित दिक्कतें होती हैं. फिलहाल मशीन को अस्पताल परिसर में बने सुपर स्पेशलिटी विंग में रखवाया गया और यहां मरीजों का इलाज किया जा रहा है.

जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डा. संजय काला ने दी जानकारी (Video credit: ETV Bharat)

अब पूरे पर्दे की होगी स्क्रीनिंग : जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डा. संजय काला ने दावा किया है कि रेटिना संबंधी दिक्कतों को दूर करने के मामले में क्लेरा अभी तक की सबसे एडवांस्ड मशीन है. इस मशीन को पूरे सूबे में केवल कानपुर के सरकारी अस्पताल में उपयोग किया जा रहा है. उन्होंने बताया, कि अभी तक चिकित्सक ऑप्थलमस्कोप की मदद से जब आंखों का इलाज करते थे तो केवल एक हिस्सा ही दिख पाता था. मगर, क्लेरा मशीन की मदद से वह आंखों का पूरा पर्दा देख सकेंगे. इसमें अंदरूनी नसों की पूरी जानकारी मिल जाएगी, फिर जो फ्लोरोसेंट डाई का उपयोग दवा के तौर पर किया जाता है, उसे भी चोट या संक्रमित हिस्से तक पहुंचाया जा सकेगा. उन्होंने कहा कि क्लेरा मशीन से आंखों का परीक्षण बेहद आसान होगा.


इन बातों को भी जानिए : शहर के एलएलआर अस्पताल में ओपीडी का पर्चा केवल एक रुपये में बनता है. एक दिन में नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में औसतन 100 मरीज पहुंचते हैं. जीएसवीएम मेडिकल काॅलेज को हाइट्स की ओर से क्लेरा मशीन दी गई है

यह भी पढ़ें : हैलट के डॉक्टरों ने पहली बार बिना चीरा किया अग्नाशय की गांठ का इलाज - HALLETT HOSPITAL KANPUR

ETV Bharat Logo

Copyright © 2025 Ushodaya Enterprises Pvt. Ltd., All Rights Reserved.