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5 PSU बैंकों में सरकार की 20% तक हिस्सेदारी बिक सकती- रिपोर्ट - PUBLIC SECTOR BANKS

सरकार अगले चार वर्षों में पांच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में अपनी 20 फीसदी तक हिस्सेदारी बेचने की योजना बना रही है.

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प्रतीकात्मक फोटो (Getty Image)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : Feb 27, 2025, 12:23 PM IST

नई दिल्ली: केंद्र सरकार पांच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में अपनी 20 फीसदी हिस्सेदारी कम करने की विस्तृत योजना पर काम कर रही है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार यह रणनीति निवेश और सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम), वित्तीय सेवा विभाग और संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के सहयोग से विकसित की जा रही है.

इस कदम का उद्देश्य भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता आवश्यकता का अनुपालन करना है. रिपोर्ट के अनुसार इसे प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा हिस्सेदारी में कमी के लिए ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) विधियों के संयोजन का उपयोग करने की उम्मीद है.

जिन बैंकों में हिस्सेदारी कम करने का लक्ष्य रखा गया है उनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 75 फीसदी से नीचे लाने की योजना है.

रिपोर्ट में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम), वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और सरकारी बैंकों के परामर्श से एक योजना पर काम कर रही है.

25 फरवरी को यह भी बताया गया कि दीपम ने सार्वजनिक क्षेत्र के लेंडर और सूचीबद्ध सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के लिए हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया में सहायता के लिए मर्चेंट बैंकरों से बोलियां आमंत्रित की हैं.

दीपम द्वारा जारी प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) के अनुसार, चयनित मर्चेंट बैंकरों को तीन साल के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, जिसमें एक साल का विस्तार भी शामिल है. और वे इन बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए इक्विटी कमजोर पड़ने के समय और संरचना पर मार्गदर्शन देंगे.

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इस कदम का उद्देश्य भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की न्यूनतम सार्वजनिक शेयरधारिता आवश्यकता का अनुपालन करना है. रिपोर्ट के अनुसार इसे प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा हिस्सेदारी में कमी के लिए ऑफर-फॉर-सेल (ओएफएस) और क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (क्यूआईपी) विधियों के संयोजन का उपयोग करने की उम्मीद है.

जिन बैंकों में हिस्सेदारी कम करने का लक्ष्य रखा गया है उनमें बैंक ऑफ महाराष्ट्र, इंडियन ओवरसीज बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब एंड सिंध बैंक शामिल हैं, जिनमें सरकार की हिस्सेदारी घटाकर 75 फीसदी से नीचे लाने की योजना है.

रिपोर्ट में एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (डीआईपीएएम), वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) और सरकारी बैंकों के परामर्श से एक योजना पर काम कर रही है.

25 फरवरी को यह भी बताया गया कि दीपम ने सार्वजनिक क्षेत्र के लेंडर और सूचीबद्ध सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के लिए हिस्सेदारी बिक्री प्रक्रिया में सहायता के लिए मर्चेंट बैंकरों से बोलियां आमंत्रित की हैं.

दीपम द्वारा जारी प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) के अनुसार, चयनित मर्चेंट बैंकरों को तीन साल के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा, जिसमें एक साल का विस्तार भी शामिल है. और वे इन बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए इक्विटी कमजोर पड़ने के समय और संरचना पर मार्गदर्शन देंगे.

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