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दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद इस शहर में है, सभी धर्म के लोग आते हैं, आगे की बात जान हो जाएंगे हैरान! - WORLD SMALLEST MOSQUE

आपको जानकर हैरानी होगी कि, दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद दक्षिण भारत में है. यहां हर धर्म के लोग आ सकते हैं.

दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद
दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : Feb 27, 2025, 5:50 PM IST

एर्नाकुलम: दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद कहां है. इस सवाल का जवाब आपको शायद हैरान कर देंगी. यह एक अंडरग्राउंड मस्जिद है और यहां किसी भी धर्म संप्रदाय के लोगों को आने की मनाही नहीं है. इस छोटी सी मस्जिद में कोई भी आ सकता है और प्रार्थना कर सकता है. बता दें कि, यह छोटी सी मस्जिद भारत में केरल के एर्नाकुलम जिले में है.

कोठामंगलम में भूमिगत बनी दुनिया की सबसे छोटी मस्जिदों में से एक अल मुबाशिरीन मस्जिद विजिटर्स के बीच उत्सुकता और आश्चर्य पैदा कर रही है. साथ ही रखरखाव समिति भी इस मस्जिद को धार्मिक सद्भाव के केंद्र में बदल रही है. मस्जिद का निर्माण मैग्स चैरिटेबल सोसाइटी के अध्यक्ष यूनुस शाह कादिरी चिश्ती के नेतृत्व में किया गया था. मैग्स चैरिटेबल सोसाइटी कोठामंगलम के पचेटी नामक क्षेत्र में एक सूफी केंद्र संचालित करती है.

दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद केरल में है.. (ETV Bharat)

मस्जिद को 3 फरवरी, 2024 को भक्तों के लिए खोल दिया गया था. उनके चौदह अनुयायियों ने 60 दिनों में मस्जिद का निर्माण किया था. मस्जिद का क्षेत्रफल केवल 80 वर्ग मीटर अंडरग्राउंड है. छोटी मस्जिद और संबंधित संरचनाओं को लगभग 65 मीटर भूमिगत खुदाई करके बनाया गया था. मस्जिद में अन्य धार्मिक समूहों से संबंधित लोगों के लिए उनकी आस्था के अनुसार पूजा करने की सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं.

इसके लिए मेडिटेशन बेंच और दो कमरे स्पेशल तौर पर प्रदान किए गए हैं. जब आप मस्जिद का सामने का दरवाजा खोलते हैं, तो पहली चीज जो आपको दिखाई देती है वह है नीचे जाने वाली सीढ़िया. अंडरग्राउंड रास्ते से आगे बढ़ने पर आपको सीढ़ियों के अंत में बाईं और दाईं ओर सुरंगें दिखाई देंगी. यहीं पर ध्यान लगाने के लिए बेंच और दो छोटे कमरे बनाए गए हैं. सुरंग को ठोस चट्टानों को छेद कर बनाया गया था. इसलिए मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसी संरचना सुरक्षित है.

बाईं ओर की सुरंग से आगे बढ़ने पर आप सबसे छोटी भूमिगत मस्जिद तक पहुंचेंगे जो हर किसी में उत्सुकता जगाती है. मस्जिद और उससे जुड़ी संरचनाएं आने वाले विजिटर्स के लिए एक शानदार दृश्य की अनुभूति कराता है. बहुत से लोग इस खूबसूरत मस्जिद को देखने आते हैं.

सोसाइटी के अध्यक्ष और सूफी आध्यात्मिक गुरु यूनुस शाह कादिरी चिश्ती ने कहा कि यहां मस्जिद और इस तरह की सुविधाएं स्थापित करने का कारण यह विश्वास है कि, अगर सभी धर्म के लोग एक ही छत के नीचे प्रार्थना करते हैं, तो उनके बीच प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है. उनका मानना है कि, ऐसे में भगवान उनकी प्रार्थना सुनेंगे.

ये भी पढ़ें: हाईकोर्ट में संभल जामा मस्जिद की रंगाई-पुताई पर सुनवाई कल

एर्नाकुलम: दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद कहां है. इस सवाल का जवाब आपको शायद हैरान कर देंगी. यह एक अंडरग्राउंड मस्जिद है और यहां किसी भी धर्म संप्रदाय के लोगों को आने की मनाही नहीं है. इस छोटी सी मस्जिद में कोई भी आ सकता है और प्रार्थना कर सकता है. बता दें कि, यह छोटी सी मस्जिद भारत में केरल के एर्नाकुलम जिले में है.

कोठामंगलम में भूमिगत बनी दुनिया की सबसे छोटी मस्जिदों में से एक अल मुबाशिरीन मस्जिद विजिटर्स के बीच उत्सुकता और आश्चर्य पैदा कर रही है. साथ ही रखरखाव समिति भी इस मस्जिद को धार्मिक सद्भाव के केंद्र में बदल रही है. मस्जिद का निर्माण मैग्स चैरिटेबल सोसाइटी के अध्यक्ष यूनुस शाह कादिरी चिश्ती के नेतृत्व में किया गया था. मैग्स चैरिटेबल सोसाइटी कोठामंगलम के पचेटी नामक क्षेत्र में एक सूफी केंद्र संचालित करती है.

दुनिया की सबसे छोटी मस्जिद केरल में है.. (ETV Bharat)

मस्जिद को 3 फरवरी, 2024 को भक्तों के लिए खोल दिया गया था. उनके चौदह अनुयायियों ने 60 दिनों में मस्जिद का निर्माण किया था. मस्जिद का क्षेत्रफल केवल 80 वर्ग मीटर अंडरग्राउंड है. छोटी मस्जिद और संबंधित संरचनाओं को लगभग 65 मीटर भूमिगत खुदाई करके बनाया गया था. मस्जिद में अन्य धार्मिक समूहों से संबंधित लोगों के लिए उनकी आस्था के अनुसार पूजा करने की सुविधाएं भी प्रदान की गई हैं.

इसके लिए मेडिटेशन बेंच और दो कमरे स्पेशल तौर पर प्रदान किए गए हैं. जब आप मस्जिद का सामने का दरवाजा खोलते हैं, तो पहली चीज जो आपको दिखाई देती है वह है नीचे जाने वाली सीढ़िया. अंडरग्राउंड रास्ते से आगे बढ़ने पर आपको सीढ़ियों के अंत में बाईं और दाईं ओर सुरंगें दिखाई देंगी. यहीं पर ध्यान लगाने के लिए बेंच और दो छोटे कमरे बनाए गए हैं. सुरंग को ठोस चट्टानों को छेद कर बनाया गया था. इसलिए मस्जिद से जुड़े लोगों का कहना है कि ऐसी संरचना सुरक्षित है.

बाईं ओर की सुरंग से आगे बढ़ने पर आप सबसे छोटी भूमिगत मस्जिद तक पहुंचेंगे जो हर किसी में उत्सुकता जगाती है. मस्जिद और उससे जुड़ी संरचनाएं आने वाले विजिटर्स के लिए एक शानदार दृश्य की अनुभूति कराता है. बहुत से लोग इस खूबसूरत मस्जिद को देखने आते हैं.

सोसाइटी के अध्यक्ष और सूफी आध्यात्मिक गुरु यूनुस शाह कादिरी चिश्ती ने कहा कि यहां मस्जिद और इस तरह की सुविधाएं स्थापित करने का कारण यह विश्वास है कि, अगर सभी धर्म के लोग एक ही छत के नीचे प्रार्थना करते हैं, तो उनके बीच प्रतिस्पर्धा खत्म हो जाती है. उनका मानना है कि, ऐसे में भगवान उनकी प्रार्थना सुनेंगे.

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