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'सेंगोल राजतंत्र का प्रतीक', सपा सांसद ने इसे हटाकर संविधान के प्रतीक को रखने की उठाई मांग - SP demands Removal of Sengol - SP DEMANDS REMOVAL OF SENGOL

RK Chaudhary demanded the removal of Sengol: समाजवादी पार्टी सांसद आरके चौधरी संसद में स्थापित सेंगोल को हटाने की मांग कर राजनीति गर्म कर दी है. सपा जहां इसे राजतंत्र का प्रतीक बताकर हटाने की मांग कर रही है. वहीं, भाजपा इसे तमिल संस्कृति का अपमान करार दे रही है. इसी विषय पर ईटीवी भारत की वरिष्ठ संवाददाता अनामिका रत्ना ने सपा सांसद आरके चौधरी से खास बातचीत की.

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फोटो (Etv Bharat and ANI)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : Jun 27, 2024, 9:34 PM IST

Updated : Jun 27, 2024, 9:41 PM IST

नई दिल्ली: जब नई संसद बनी तब प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना की थी और इसमें तमिलनाडु से आए कई धर्मगुरु भी शामिल हुए थे. मगर 2024 के चुनाव के बाद अब जब नए सत्र की शुरुआत हुई है इसपर सवाल उठाए जाने लगे हैं,इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के सांसद आरके चौधरी ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर इसे हटाकर संविधान के प्रतीक को रखने की मांग की है.

समाजवादी पार्टी सांसद आरके चौधरी से खास बातचीत (ETV Bharat)

सपा सांसद आरके चौधरी ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि, सेंगोल को पुरातन काल में दंड स्वरूप माना जाता था जिसमें दंडाधिकारी दंड दिया करते थे और संसद में ऐसे प्रतीक का कोई काम नहीं है क्योंकि अब देश में प्रजातंत्र है राजतंत्र नहीं.

समाजवादी पार्टी के सांसद आर के चौधरी ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर राजतंत्र के प्रतीक सेंगोल को हटाकर संविधान के प्रतीक स्थापित करने की मांग की है. इस सवाल पर की इससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं खासकर तमिलनाडु के लोगों की भावनाएं भी आहत होंगी. सपा सांसद चौधरी ने कहा की इसमें भावनाओं के आहत होने की कोई बात नही ये मात्र सियासत है.

उन्होंने आगे कहा कि, संसद राजनीति का क्षेत्र है और यहां धार्मिक चीजों का क्या स्थान है. यदि संत पुरोहितों ने कुछ दिया तो आप उसे लाकर संसद में लगा देंगे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया की संसद में सेंगोल की स्थापना सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए लगाया गया है. सपा सांसद की इस मांग के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ने सांसद की मांग को जायज ठहराया है.

ये भी पढ़ें: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण के बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित

नई दिल्ली: जब नई संसद बनी तब प्रधानमंत्री ने नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना की थी और इसमें तमिलनाडु से आए कई धर्मगुरु भी शामिल हुए थे. मगर 2024 के चुनाव के बाद अब जब नए सत्र की शुरुआत हुई है इसपर सवाल उठाए जाने लगे हैं,इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के सांसद आरके चौधरी ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर इसे हटाकर संविधान के प्रतीक को रखने की मांग की है.

समाजवादी पार्टी सांसद आरके चौधरी से खास बातचीत (ETV Bharat)

सपा सांसद आरके चौधरी ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि, सेंगोल को पुरातन काल में दंड स्वरूप माना जाता था जिसमें दंडाधिकारी दंड दिया करते थे और संसद में ऐसे प्रतीक का कोई काम नहीं है क्योंकि अब देश में प्रजातंत्र है राजतंत्र नहीं.

समाजवादी पार्टी के सांसद आर के चौधरी ने लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी लिखकर राजतंत्र के प्रतीक सेंगोल को हटाकर संविधान के प्रतीक स्थापित करने की मांग की है. इस सवाल पर की इससे लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं खासकर तमिलनाडु के लोगों की भावनाएं भी आहत होंगी. सपा सांसद चौधरी ने कहा की इसमें भावनाओं के आहत होने की कोई बात नही ये मात्र सियासत है.

उन्होंने आगे कहा कि, संसद राजनीति का क्षेत्र है और यहां धार्मिक चीजों का क्या स्थान है. यदि संत पुरोहितों ने कुछ दिया तो आप उसे लाकर संसद में लगा देंगे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया की संसद में सेंगोल की स्थापना सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए लगाया गया है. सपा सांसद की इस मांग के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी ने सांसद की मांग को जायज ठहराया है.

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Last Updated : Jun 27, 2024, 9:41 PM IST
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