हल्द्वानी:पूरे देश में बाघ संरक्षण को लेकर में उत्तराखंड टॉप फाइव में जगह बनाने सफल रहा. यहां बाघों की संख्या 340 से बढ़कर 442 हो गई है. जहां प्रदेश में एक तरफ बाघों की संख्या में वृद्धि हो रही है तो वहीं, दूसरी तरफ वन विभाग के सामने वन्यजीव संघर्ष और बाघों की सुरक्षा भी एक चुनौती बनकर उभरी है.
उत्तराखंड में बाघों की संख्या में वृद्धि खुशी से ज्यादा चुनौती, जानिए कैसे ? - उत्तराखंड में बाघों की वृद्धि से खुशी का माहौल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ल्ड टाइगर-डे के मौके पर बाघों की गणना की घोषणा करते हुए उत्तराखंड सरकार, वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों को बधाई दी, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती अब वन विभाग के सामने है.बाघों के बढ़ते कुनबे से मानव वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं और वन्यजीव तस्करों से निपटने की चुनौती भी होगी.

बता दें कि उत्तराखंड में लगातार बाघों की संख्या में वृद्धि हो रही है. 2018 की गणना के अनुसार बाघों की संख्या लगभग 340 थी जो कि बढ़कर 442 तक पहुंच गई है. ऐसे में वन विभाग के साथ वन्यजीव प्रेमियों में खुशी का माहौल है, लेकिन अब सवाल बाघों के रहने, जंगलों में पर्याप्त भोजन और सुरक्षा को लेकर है. सबसे बड़ी चुनौती बाघों का वन्यजीव तस्करों और शिकारियों को रोकना भी है. क्योंकि, मॉनसून में शिकारी सक्रिय हो जाते हैं.
वहीं वन मंत्री हरक सिह रावत भी बाघों के बढ़ते कुनबे से खासा उत्साहित हैं. लेकिन उनका मानना है कि बाघों की बढ़ती संख्या विभाग के लिए चुनौतीपूर्ण है. मंत्री हरक सिंह रावत ने ये भी कहा कि बाघों की बढ़ती संख्या के साथ उनकी सुरक्षा और संरक्षण करना वन विभाग की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. इसके लिए अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है. इस पर मंथन कर कोई ठोस योजना बनाई जाएगी और इसे जल्द जमीनी स्तर पर लाकर बाघों का संरक्षण करने का काम किया जाएगा.