उत्तराखंड

uttarakhand

ETV Bharat / state

पुरानी टिहरी को देखने देहरादून में यहां लगती है भीड़, याद कर छलक उठता है 'दर्द' - पुरानी टिहरी को लोगों ने किया याद

पुरानी टिहरी...एक ऐसा शहर जिसे विकास और आधुनिकता की कीमत चुकाने के लिए जल समाधि लेनी पड़ी. 31 जुलाई 2004 ये वो ही दिन था जब पुरानी टिहरी विशालकाय झील में समा गई थी. खेत खलिहान, ऐतिहासिक इमारतें, घंटाघर और राजा का दरबार देखते ही देखते पानी की तलहटी में चला गया और जो बचा वो सिर्फ यादों में ही रह गया.

18 years old Tehri was submerged
देहरादून में पुरानी टिहरी को देखने यहां लगती है भीड़

By

Published : Aug 1, 2022, 3:29 PM IST

Updated : Aug 1, 2022, 4:38 PM IST

देहरादून: पुरानी टिहरी को जलमग्न हुए 18 साल पूरे हो गए. 31 जुलाई 2004 वह दिन था जब पूरे टिहरी शहर को डुबो दिया गया. आखिरी व्यक्ति को इसी दिन यहां से विस्थापित किया गया. आज भी पुरानी टिहरी को याद कर वहां के वाशिंदे भावुक हो उठते हैं. राजधानी देहरादून के बल्लूपुर चौक स्थित वनस्थली इलाके में रहने वाले सुबोध बहुगुणा बीते कई सालों से पुरानी टिहरी की यादों को कुछ अलग अंदाज में संजोय हुए हैं. सुबोध बहुगुणा ने अपने बुजुर्गों और पिता स्वर्गीय गोपाल राम बहुगुणा की प्रेरणा पर अपने घर में ही पुराने टिहरी शहर की प्रतिकृति तैयार की हुई है. जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं और पुरानी टिहरी की याद को ताजा करते हैं.

ईटीवी भारत से बात करते हुए बहुगुणा ने बताया कि पुरानी टिहरी की प्रतिकृति को उन्होंने अपने पिता स्वर्गीय गोपालराम बहुगुणा के मार्ग दर्शन से तैयार किया है. पुरानी टिहरी की प्रतिकृति को तैयार करने के लिए बहुगुणा ने घरों में इस्तेमाल होने वाली टाइल्स के टुकड़े, ईंट के टुकड़े, पुराने गद्दे की रुई और सीमेंट इत्यादि का इस्तेमाल किया.

देहरादून में पुरानी टिहरी को देखने यहां लगती है भीड़

बारिश के बावजूद टिहरी शहर के कई मूल निवासियों समेत गढ़वाल मंडल विकास निगम के महाप्रबंधक अनिल गबरियाल ने भी इस शहर की अपनी यादें ताजा कीं. साथ ही इस शहर की रेप्लिका पर हर साल की तरह दिए और कैंडल जलाकर इस शहर को याद किया गया.

पढ़ें-यादों में टिहरी: तारीखों में पुरानी टिहरी की एक झलक

बता दें कि इस पुरानी टिहरी की प्रतिकृति में आप घंटाघर, राजा का दरबार, प्रताप इंटर कॉलेज, बस अड्डा, आजाद मैदान और टिहरी बाजार की स्मृतियां देख सकते हैं. बहुगुणा को जहां पुरानी टिहरी शहर के डूबने का गम है तो वहीं उन्हें गर्व भी है. टिहरी शहर ने बांध के पानी में समाकर खुद को विकास के लिए समर्पित किया.

बहुगुणा ने कहा कि पुरानी टिहरी एक खूबसूरत शहर होने के साथ ही अनेकता में एकता का प्रतीक भी थी. जिस एकता के साथ पुरानी टिहरी में लोग रहते थे, वह एकता और भाईचारा आज कहीं देखने को नहीं मिलता है.

पढ़ें-यादों में 'टिहरी', आज भी पानी के अंदर शान से खड़ा है घंटाघर

पुरानी टिहरी का इतिहास
पुराना टिहरी शहर तीन नदियां भागीरथी, भिलंगना और घृत गंगा, जो विलुप्त हो गई थी से घिरा हुआ था. इसलिए इसको त्रिहरी नाम से पुकारा जाता था. बाद में इसे टिहरी नाम से जाना जाने लगा.

राजा सुदर्शन शाह ने बसाया था शहर

  • इस शहर को राजा सुदर्शन शाह ने दिसम्बर 1815 में बसाया था.
  • जब इस शहर को बसाया गया उस समय ज्योतिष ने कहा कि इस शहर की उम्र कम है.
  • साल 1965 में तत्कालीन केन्द्रीय सिंचाई मंत्री के एल राव ने टिहरी बांध बनाने की घोषणा की.
Last Updated : Aug 1, 2022, 4:38 PM IST

ABOUT THE AUTHOR

...view details