वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने संसदीय क्षेत्र को हर साल बड़ी से बड़ी सौगात देते हैं. इसी साल 7 जुलाई को भी उन्होंने हजारों करोड़ों रुपए की योजनाओं की सौगात बनारस को दी. जिनमें कई ऐसे प्रोजेक्ट शामिल थे, जो काफी लंबे वक्त से बनारस की छवि को बदलने के लिए तैयार किए जा रहे थे. ऐसा ही एक प्रोजेक्ट था दशाश्वमेध घाट के ऊपर गंगा व्यू गैलरी के साथ बनाया गया दशाश्वमेध भवन है.
इसका पहले नाम दशाश्वमेध प्लाजा था, लेकिन अब इसको दशाश्वमेध भवन के नाम से जाना जाता है. लगभग 28.50 करोड़ की लागत से 3082 वर्ग फीट में तैयार हुआ यह प्रोजेक्ट बनारस के सबसे बड़े कमर्शियल प्रोजेक्ट के तौर पर जाना जाता है, क्योंकि यहां पर 196 दुकानों के साथ ही 14 दुकान फूड कोर्ट में और दो ओपन रेस्टोरेंट की सौगात प्रधानमंत्री ने बनारस को दी थी, लेकिन 7 जुलाई 2022 को प्रधानमंत्री के हाथों उद्घाटन होने के बाद भी यह भवन वीरान पड़ा हुआ है. हाल यह है कि यहां अब तक एक भी दुकान का शटर ओपन नहीं हो सका है.
गौरतलब है कि वाराणसी में लगभग 20 साल पुराने प्रोजेक्ट को एक बार फिर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासनकाल में तैयार किया गया था. 7 जुलाई 2022 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी दौरे पर इस भवन का उद्घाटन भी कर दिया. माना जा रहा था 10 दिन के अंदर इस भवन में मौजूद दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा. तीन मंजिला कांपलेक्स में उन तमाम हाईटेक सुविधाओं को रखा गया है जो एक कमर्शियल कंपलेक्स में जरूरी होती है.
एस्केलेटर के साथ लिफ्ट की सुविधा और पर्यटकों के बैठने के लिए शानदार व्यवस्था. इसके अलावा यहां पर मौजूद दुकानों की साइज भी अलग-अलग है. नगर निगम के द्वारा पुराने किराएदार के तौर पर छोटी-छोटी दुकान संचालित करने वाले दुकानदारों को आवंटित किए जाने की प्रक्रिया की जानी थी. बड़े ही नॉमिनल रेट पर इन दुकानों को लगभग इस एरिया के 140 छोटे दुकानदारों को आवंटित किया जाना था. ताकि सड़क से दुकानें हटकर एक भवन के अंदर ही संचालित हो सके और दुकानदारों का जीवन स्तर भी सुधर सके, लेकिन आज भी इस भवन के उद्घाटन के 3 महीने पूरे होने के बाद भी यहां पर एक भी दुकान का शटर नहीं खुल पाया है.
इस बारे में जब ईटीवी भारत की टीम ने पड़ताल शुरू की तो पता चला कि अब तक 196 में से सिर्फ 40 दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया ही पूरी की जा सकी है. बाकी शेष दुकानों के आवंटन के लिए कोई आ ही नहीं रहा है. कई बार निविदा निकलने के बाद भी वाराणसी विकास प्राधिकरण के पास खरीदारों का न पहुंचना थोड़ा परेशानी बढ़ाने वाला जरूर है. हालांकि जब हमने इस बारे में अधिकारियों से बातचीत की तो उन्होंने इस संदर्भ में कैमरे पर तो बातचीत करने से इंकार किया.