उन्नाव: एक ओर जहां जनपद में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव है तो वहीं दूसरी ओर मौरावां में नवनिर्मित '100 शैय्या' अस्पताल शुरू होने से पहले ही विवादों से घिर गया है. मामला और भी ज्यादा गंभीर इसलिए हो गया कि गत 28 सितंबर 2020 में इसी अस्पताल का लोकार्पण भी खुद मुख्यमंत्री के हाथों अधिकारियों ने करवा दिया था.
बता दें कि इस अस्पताल का निर्माण मौरावां के एक तालुकेदार ट्रस्टी विवेक सेठ द्वारा दान दी गई 14 बीघे जमीन पर किया गया है. इस अस्पताल के कागजी कोरम को पूरा करने में प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही अब सरकार के गले की फांस बन गई है, क्योंकि दानदाता से 14 बीघे जमीन लेकर अस्पताल निर्माण की आजतक कोई भी कागजी कार्यवाही पूरी नहीं की गई, जबकि दान में मिली इसी जमीन पर कई वर्षों तक चले निर्माण कार्य के बाद करीब 40 करोड़ की लागत से बना यह अस्पताल अब बन कर तैयार है, लेकिन जमीन को अस्पताल के या सरकार के नाम किये जाने को कोई कार्रवाई आज तक पूरी ही नहीं की गई, जिससे बिल्डिंग निर्माण के बाद अब अस्पताल भवन के हैंडओवर की प्रक्रिया भी अधर में लटक गई है.
दरअसल, अस्पताल निर्माण के बाद अब अस्पताल के चर्चा में आने के पीछे की वजह अस्पताल का नाम है, जिसको लेकर जमीन दान देने वाले तालुकेदार और ट्रस्टी ने आपत्ति दर्ज करवाई है और आपत्ति का निराकरण न किये जाने पर न्यायालय की शरण में भी जाने की बात कही है. अब देखना यह है कि यह विवाद कब और कैसे सुलझता है और आसपास के लाखों की आबादी जो बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की आस लगा कर बैठी है, उसकी आस कब पूरी होगी.
इसलिए आया विवादों में
इस अस्पताल के विवादों से घिरने की मुख्य वजह इस अस्पताल का नाम है. दरअसल, इस अस्पताल का निर्माण स्थानीय तालुकेदार विवेक सेठ द्वारा अपने 'मेला रामलीला मौरावां ट्रस्ट' से दान दी गई जमीन पर किया गया है. जमीन दान देते समय विवेक सेठ ने सरकार और प्रशसनिक अधिकारियों के सामने दो शर्ते रखी थीं. पहली शर्त में विवेक सेठ ने अस्पताल का नाम अपने पूर्वजों के नाम पर रखे जाने की बात कही थी, जबकि दूसरी शर्त में कहा था कि अस्पताल को दान दी गई जमीन का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अस्पताल और स्वास्थ्य कार्यों के लिए ही किया जाएगा. ऐसा न होने पर जमीन स्वतः ही ट्रस्ट के पास वापस आ जाएगी. तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों ने मौखिक सहमति देकर बिल्डिंग निर्माण कार्य शुरू करवा दिया था. समय बीतता गया अधिकारी बदलते गए, अस्पताल का निर्माण कार्य भी पूरा हो गया, लेकिन ट्रस्ट से जमीन लेने की कोई भी कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई. इसके साथ ही जो भी शर्तें दानकर्ता और सरकार के बीच हुईं थी वो भी सब हवा-हवाई हो गईं.
निर्माण पूरा होते ही ट्रस्टी ने उठाये सवाल
उन्नाव के मौरावां में 100 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है. मेला रामलीला मौरावां ट्रस्ट से दान में मिली 14 बीघे जमीन पर अस्पताल को बनाने में करीब 40 करोड़ रुपये का खर्च हुआ है. अधिकारियों की लापरवाही का आलम यह है कि जिले के जिम्मेदार अधिकारियों ने सितंबर 2020 में इस अस्पताल का लोकार्पण भी खुद सीएम योगी से करवा दिया.