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रायबरेलीः खौफनाक था NTPC हादसे का वो मंजर, भूलने से भी नहीं भूलते दृश्य - ऊंचाहार एनटीपीसी हादसे की कहानी

एनटीपीसी ऊंचाहार हादसे को 3 साल बीत चुके हैं, लेकिन आज भी प्लांट के नजदीक रहने वाले लोगों के मन में उस घटना का खौफ ताजा है. हादसे का भय आज भी लोग महसूस करते हैं. ईटीवी भारत ने एनटीपीसी परिसर से सटे इलाके में रह रहे स्थानीयों से इस विषय में बातचीत कर उनका हाल जाना. सुनें स्थानीय लोगों की जुबानी...

ऊंचाहार एनटीपीसी में धमाका.
ऊंचाहार एनटीपीसी में धमाका.

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Published : Oct 31, 2020, 10:50 PM IST

रायबरेलीः तारीख- 1 नवंबर 2017 समय - दोपहर करीब 3:45 जगह - एनटीपीसी के ऊंचाहार परिसर की 500 MW की छठी परियोजना. तेज आवाज के साथ बड़ा धमाका... एनटीपीसी की इसी 500 मेगावाट क्षमता की छठी यूनिट में बॉयलर फटा था. मंजर इतना खौफनाक था कि जो भी धमाके की जद में आया जिंदा जल गया. किसी को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर हुआ क्या है? उस भीषण दुर्घटना की तीसरी बरसी पर ईटीवी भारत ने हादसे के कुछ चश्मदीदों से मुलाकात कर घटना वाले दिन के बारे जानकारी हासिल की और यह भी जानने का प्रयास किया कि आखिर क्यों आज भी उनका मन किसी दूसरे धमाके के डर से आशंकित रहता है. देखिये ईटीवी भारत की ये स्पेशल रिपोर्ट...

ऊंचाहार एनटीपीसी में धमाके की कहानी.

3 साल बाद भी आंखों के सामने हैं वो खौफनाक मंजर
एनटीपीसी के ऊंचाहार प्लांट परिसर की दीवाल के बेहद नजदीक परिवार समेत के साथ रहने वाले तीरथ प्रसाद साहू कहते हैं कि कभी न भूलने वाली वह घटना भयावह थी. शब्दों में उसको बयान नहीं किया जा सकता. दिन के करीब 3:30 से 3:45 का समय रहा होगा. धमाका बेहद तेज था. बॉयलर फटने से पूरे इलाके में रात की धुंध छा गई थी. राख फैलने के कारण हर ओर अंधेरा हो गया था. उस राख की जद में जो कोई भी आया, वह सभी झुलस गए.

ऊंचाहार एनटीपीसी.

45 की हुई थी मौत
करीब 45 लोग मारे गए और सैकड़ों की संख्या में घायल हुए थे. हर ओर चीख-पुकार का मंजर था. किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था. लोग समझ ही नहीं पा रहे थे, आखिर हुआ क्या है? बाद में सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया. कई ऐसे भी थे जिन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया था. बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी इस घटना में हताहत हुए थे.

ऊंचाहार एनटीपीसी.

डर के आलम में गुजरती है जिंदगी
ईटीवी भारत से बातचीत में तीरथ कहते हैं कि छोटे बच्चों समेत उनका पूरा परिवार वर्षों से यहीं पर रहता आया है. पर नवंबर 2017 की घटना के बाद से सभी में डर समाया हुआ है. हम लोग भय के साएं में जीते हैं. डर इस बात का है कि कहीं किसी रोज फिर वैसे ही कोई घटना न जन्म ले ले और उनमें से कोई उसकी जद में न आ जाए. उसी को लेकर मन आशंकित रहता है. वह यह भी दावा करते हैं कि यह हाल केवल उन्हीं का नहीं है बल्कि आस-पड़ोस के तमाम गांवों में रह रहे लोग भी कुछ ऐसा ही सोचते हैं.

ठोस कदम उठाने की है जरुरत
तीरथ कहते हैं कि घटना से एनटीपीसी को जरूर सबक लेना चाहिए और कुछ ऐसे कदम उठाने चाहिए कि भविष्य में कभी भी ऐसे किसी हादसे की पुनरावृत्ति न हो सके. इसके अलावा केंद्र सरकार को भी ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए. स्थानीय लोगों के पास यहां से चले जाने का भी विकल्प नहीं है और यह सभी की सुरक्षा का मसला है. इसीलिए सरकार को बेहद गंभीरता से इस विषय को देखना चाहिए.

कई अधिकारियों ने गवांई थी जान
इस हादसे में एनटीपीसी के तीन अतिरिक्त महाप्रबंधक समेत कुल 45 लोगों की मौत हो गई थी. हादसा बहुत बड़ा था जिसके बाद सत्तारुढ़ दल भाजपा और कांग्रेस के कई बड़े नेता ऊंचाहार गए थे. हादसे के कारणों की जांच के लिए टीमें गठित की गई थीं. हालांकि बाद में यह स्पष्ट नहीं हो सका कि हादसे का असल जिम्मेदार कौन है? वहीं एनटीपीसी ने करीब एक साल बाद यह माना था कि हादसे से सबक लेते हुए भविष्य में ऐसे किसी भी दुर्घटना से बचने के लिए कारगर कदम उठाए गए हैं.

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