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'हाजी कल्लन भवन' जहां से 1930 में शुरू हुआ था पीतल उत्पादों का निर्यात - मुरादाबाद का पीतल व्यवसाय

यूपी के मुरादाबाद को पीतलनगरी कहा जाता है. पीतल कारोबार के निर्यातकों वाले इस शहर में निर्यात की शुरुआत 1930 में हाजी कल्लन ने की थी. देखिए ईटीवी भारत की खास रिपोर्ट.

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हाजी कल्लन भवन.

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Published : Jan 28, 2020, 7:55 AM IST

Updated : Jan 28, 2020, 10:50 AM IST

मुरादाबाद:जिले का पीतल उद्योग हर साल दुनिया में साढ़े आठ हजार करोड़ रुपये का कारोबार करता है. देश के हस्तशिल्प कारोबार में इसकी भागीदारी लगभग 30 प्रतिशत है. पांच लाख से ज्यादा पीतल कारीगरों को रोजगार देने वाला यह कारोबार पूरी दुनिया में इस शहर के नाम को विशेष पहचान भी दिलाता है. रामगंगा नदी किनारे मुगल काल में बसे इस शहर में पीतल उत्पाद बनाने का काम ईरानी कारीगरों ने शुरू किया था.

एजाज हुसैन उर्फ हाजी कल्लन ने की थी शुरुआत
इस पीतल को दुनिया तक पहुंचाने का काम एक स्थानीय निवासी एजाज हुसैन उर्फ हाजी कल्लन द्वारा किया गया. उन्नीसवीं सदी के तीसरे दशक में दिल्ली के व्यापारी की मदद से इंग्लैंड और न्यूयार्क के लिए उत्पाद तैयार किये गए. मुरादाबाद के पहले पीतल निर्यातक अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनका परिवार आज भी अपनी विरासत को सहेज कर रखे हुए है.

हाजी कल्लन भवन पर स्पेशल रिपोर्ट.
1930 में की थी शुरुआत
मुगलपुरा क्षेत्र स्थित जामा मस्जिद चौराहे पर खड़ी यह बिल्डिंग दिखने में आपको आम लगे, लेकिन इस बिल्डिंग की दीवारों में पीतल कारोबार का इतिहास दर्ज है. मुरादाबाद को पीतलनगरी नाम देने की शुरुआत सबसे पहले यहीं से शुरू हुई थी और आज यह दुनिया में फैल गई.
हजारों करोड़ रुपये के पीतल कारोबार और तीन हजार से ज्यादा निर्यातकों वाले इस शहर में निर्यात की शुरुआत 1930 में हाजी कल्लन ने की थी. जामा मस्जिद क्षेत्र में रहने वाले हाजी कल्लन ने दिल्ली में रहने वाले एक व्यापारी की मदद से पीतल उत्पाद भेजने शुरू किए और वहां से अंग्रेज इन उत्पादों को अपने साथ लंदन ले गए. अंग्रेजों की रुचि पीतल उत्पादों में बढ़ी तो हाजी कल्लन को ऑर्डर मिलने शुरू हुए और उसके बाद यह सिलसिला अमेरिका तक पहुंच गया.

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दिल्ली से किया जाता था कारोबार
पीतल कारोबार के शुरुआती दौर में आज जैसी सुविधाएं नहीं थीं. लिहाजा ज्यादातर कारोबार दिल्ली से किया जाता था. विदेशी यात्री और अंग्रेज अधिकारी दिल्ली से ही पीतल के उत्पादों को खरीदते थे. हाजी कल्लन ने पहले अपने भाइयों और फिर बेटों संग निर्यात हाउस शुरू किया और स्थानीय कारीगरों को रोजगार देकर पीतल को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचा दिया. मुगलपुरा स्थित हाजी कल्लन भवन में आज भी परिवार पीतल कारोबार के जरिये अपनी विरासत को आगे बढ़ा रहा है.

इतिहास संग्रहित करने की अपील
पीतल निर्यात की शुरुआत कर हाजी कल्लन ने शहर को अलग पहचान दी और आज लाखों लोग इस कारोबार के जरिए रोजगार हासिल कर रहे हैं. पीतल कारोबार से जुड़े लोग अब सरकार से एक म्यूजियम बनाकर पीतल के इतिहास को संग्रहित करने की अपील कर रहें है ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने अतीत को हमेशा याद रखें.

हाजी कल्लन भवन से शुरू हुआ पीतल का सफर आज बड़ी-बड़ी निर्यात फर्मों तक पहुंचकर हर रोज अपने सफर की नई दास्तां लिख रहा है. करोड़ों रुपये के इस कारोबारी सफर को शुरू करने वाले पहले निर्यातक भले ही अब इस दुनिया में न हो, लेकिन उनके मजबूत इरादे हमेशा कारोबारियों को हौसला देते नजर आते हैं.

Last Updated : Jan 28, 2020, 10:50 AM IST

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