मिर्जापुर : कालीन निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष जर्मनी के हनोवर शहर में दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला लगता है. जिसे डोमोटेक्स मेले के नाम से जाना जाता है. मगर अबकी बार कोरोना महामारी के कारण कालीन मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा है, उसे रद्द कर दिया गया है. वहीं इस बार मिर्जापुर में कालीन उद्योग को गति देने के लिए वर्चुअल मेगा मेले का आयोजन किया जा रहा है. यह मेला आज (27 जनवरी) से एक फरवरी तक चलेगा. इसमें लगभग 60 से 65 देशों के शामिल होने की उम्मीद है. अब तक इसके लिए 40 से 45 देशों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है. इस मेले से कोरोना काल में हुए नुकसान के भरपाई की उम्मीद जगी है.
वर्चुअल मेगा फेयर का आयोजन
कोरोना महामारी के चलते अर्थव्यवस्था की कमर तोड़कर रख दी है. इससे भारत की कालीन भी नहीं बच सकी है. वहीं अब कालीन उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए वर्चुअल कारपेट मेगा फेयर का आयोजन किया जा रहा है. दरअसल हर साल जनवरी महीने में जर्मनी के हनोवर शहर में दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय कालीन मेला लगता है. कोरोना महामारी के चलते इस मेले को आगे बढ़ाकर मई महीने में किया गया था. लगातार वहां पर कोरोना के बढ़ते और लॉकडाउन के चलते मई में लगने वाला मेला भी रद्द कर दिया गया है. जर्मनी में फेयर रद्द होने के बाद सीईपीसी के चेयरमैन सिद्धनाथ सिंह की अध्यक्षता में मिर्जापुर में वर्चुअल फेयर आयोजित किया जा रहा है.
600 आयातकों की भागीदारी का लक्ष्य
जर्मनी और यूरोप के देशों में इन दिनों कोरोना संक्रमण के चलते लॉक डाउन लगा हुआ है जिसके कारण भारतीय कालीन का वर्चुअल मेगा मेला का आयोजन किया जा रहा है. लॉकडाउन में चार महीने पहले वर्चुअल मेला करके निर्यातकों को फायदा मिला था. जिसको देखते हुए एक बार फिर वर्चुअल मेगा मेले का आयोजन किया जा रहा है. वर्चुअल मेगा मेला 27 जनवरी से एक फरवरी तक चलेगा. इसमें पूरे दुनिया के 60 से 65 देशों के शामिल होने का उम्मीद है. अभी तक 40 से 45 देश के लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं. हर देश से 12 से 20 बायर्स के जुड़ने की संभावना है. पूरे देश से 600 आयातकों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है. वर्चुअल मेगा मेला में 300 से अधिक निर्यातकों को स्टॉल लगाने की सुविधा होगी.
मेले से कालीन व्यापारियों को उम्मीद
कोरोना काल में पिछले साल 21 अगस्त से 25 अगस्त तक वर्चुअल भारतीय कालीन मेले में 174 निर्यातकों ने अपने उत्पाद का प्रदर्शन किया था. इस मेले में 62 देशों के 400 आयातकों ने अपनी भागीदारी की थी. जिसमें एक्सपोर्टर को काफी फायदा मिला था. इसी फायदे के देखते हुए दुबारा वर्चुअल मेगा कालीन फेयर का आयोजन किया जा रहा है. इस मेले में पूरे दुनिया के बायर्स आ रहे हैं. कोरोना के चलते अभी तक 3000 करोड़ से ज्यादा भारतीय कालीन को नुकसान उठाना पड़ है. कोरोना वैश्विक महामारी के कारण कालीन उद्योग को हुए नुकसान की कुछ भरपाई की उम्मीद अब इस वर्चुअल मेगा मेले से उम्मीद जगी है.