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महोबा: पत्थर मंडी में संकट, लाखों मजदूर बेरोजगारी की कगार पर - महोबा समाचार

उत्तर प्रदेश सरकार की खनन नीति के विरोध में जिले के क्रेशर व्यवसायी हड़ताल पर है. इससे सरकार को अरबों रुपये का घाटा होने का अनुमान है. हड़ताल की वजह से लगभग एक लाख मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट खड़ा हो गया है.

महोबा जिले के क्रेशर व्यवसायी हड़ताल पर चल रहे हैं.

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Published : Aug 23, 2019, 5:10 PM IST

महोबा: उत्तर प्रदेश सरकार की खनन नीति के विरोध में महोबा जिले के क्रेशर व्यवसायी हड़ताल पर चल रहे हैं. इससे लगभग एक लाख मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट बढ़ गया है. सरकार को पत्थर मंडी से मिलने वाला राजस्व भी तालाबंदी के कारण कम होने के आसार बढ़ गए हैं.

जानकारी देते क्रेशर मालिक.


17 अगस्त से क्रेशर यूनियन ताला लगाकर हड़ताल पर
जिले की ग्रेनाइट पत्थर मंडी कबरई से सालाना लगभग 400 करोड़ रुपये का राजस्व सरकार को जाता है, लेकिन तालाबंदी के कारण 10 करोड़ की लागत वाले स्टोन क्रेशर नीलामी की कगार पर पहुंच गए हैं. जिले में स्थापित सबसे बड़ी पत्थर मंडी पर 17 अगस्त से क्रेशर यूनियन ताला लगाकर हड़ताल पर चले गए हैं. इस तालाबंदी से लगभग एक लाख मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जबकि 5 हजार के करीब ट्रक बेकार खड़े हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि एनएच 34 के टोल प्लाजा पर सन्नाटा पसरा हुआ है. राज्य की खनन नीति के विरोध में यह तालाबंदी हुई है.

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एक लाख मजदूरों के सामने रोजी रोटी का संकट
इस मंडी से रोज पांच हजार ट्रक गिट्टी लेकर देश और प्रदेश के कोने-कोने में जाते थे. मंडी का सिर्फ बिजली बिल ही करीब 20 करोड़ रुपये का होता था. इस हड़ताल की वजह से सरकार को अरबों रुपये का घाटा होने का अनुमान है. स्टोन क्रेशरों की हड़ताल के बाद इससे जुड़े सभी उघोग भी ठप्प हो गए हैं. पहाड़ो में काम करने वाले एक लाख मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, तो जेसीबी ड्राइवर मशीन ऑपरेटर्स, ट्रक ड्राइवर, ढाबे वालों पेट्रोल-पम्प आदि के कारोबार प्रभावित हुए हैं.


मालिकों के सामने कर्ज अदा न कर पाने की समस्या
एक स्टोन क्रेशर लगने में 3 से 6 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है और बाकी मशीनरी को मिलाकर 10 करोड़ तक की लागत आ जाती है. तालाबंदी से स्टोन क्रेशर लगाने के लिए बैंकों से करोड़ों का कर्ज लिए क्रेशर मालिकों के सामने कर्ज न अदा कर पाने पर क्रेशरों की नीलामी का खतरा भी मंडराने लगा है.

क्रेशर मालिकों का कहना है कि शासन की खनिज नीति के कारण उन्होंने हड़ताल की है. महोबा जिले का कबरई कस्बा पत्थर उद्योग नगरी के नाम से भी जाना जाता है. यहां पर उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा पत्थर बाजार है. कबरई कस्बे के आसपास लगभग 350 स्टोन क्रेशर लगे हैं.

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खनन नीति से क्रेशर मालिकों की कमर टूट गई
क्रेशर मालिकों ने बताया कि प्रदेश सरकार की नई खनन नीति से पहाड़ के ठेकेदारों और क्रेशर मालिकों की कमर टूट गई है. यहां से सालाना लगभग 400 करोड़ रुपये का राजस्व जाता है, लेकिन सरकार की नई खनन नीति के कारण अब मात्र 100 करोड़ रुपये का राजस्व जा रहा है. मध्य प्रदेश में रॉयल्टी की कीमत 130 रुपये है, जबकि हमारे यहां 650 रुपये. इसलिए अब मध्य प्रदेश क्रेशर मंडी शिफ्ट हो रही है.


टोल प्लाजा मैनेजर प्रवेंद्र कुमार ने बताया कि पहले यहां से 4-5 हजार गाड़ियां निकलती थी, लेकिन इस समय मात्र दो हजार गाड़ियां निकल रही है. क्रेशर मंडी में हड़ताल चल रही है, इसलिए गाड़ियां कम आ रही है. इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है.

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