लखनऊ: कोरोना के कारण सात माह से ज्यादा समय तक बंद रहने के बाद 17 अक्टूबर से तेजस का संचालन शुरू हुआ. आईआरसीटीसी को उम्मीद थी कि इस ट्रेन को त्योहारों के मौके पर सवारियां मिलेंगी तो पिछला घाटा पूरा हो सकेगा, लेकिन आईआरसीटीसी की यह उम्मीद नाउम्मीदी में तब्दील हो गई है. इतने दिन बाद शुरू हुई तेजस को सवारियां ही नहीं मिल रही हैं. मात्र 25 से 30 फीसद सवारियां ही तेजस से सफर कर रही हैं, ऐसे में आईआरसीटीसी को तगड़ा झटका लगा है.
210 दिन बाद शुरू हुआ था संचालन
210 दिन के बाद यार्ड से निकलकर देश की पहली कॉरपोरेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस ने पटरियों पर दौड़ना शुरू किया. 17 अक्टूबर को जब यह ट्रेन सवारियों को लेकर लखनऊ से दिल्ली के लिए रवाना हुई तो आईआरसीटीसी के अधिकारियों को मायूसी हाथ लगी. यह मायूसी आठ दिन बीत जाने के बाद अभी खत्म नहीं हुई है. हर रोज पूरी ट्रेन में 150 से 170 के बीच ही यात्री लखनऊ से दिल्ली के लिए सफर कर रहे हैं. यही हाल दिल्ली से लखनऊ की तरफ आने वाली तेजस का भी है. औसतन डेढ़ सौ यात्रियों के सफर करने से आईआरसीटीसी को काफी नुकसान भी उठाना पड़ रहा है, हालांकि अधिकारी उम्मीद जता रहे हैं कि कोरोना जैसे-जैसे खत्म होगा, वैसे-वैसे यात्री सफर करने के लिए निकलेंगे और फिर तेजस एक्सप्रेस पहले की तरह फायदे की पटरी पर दौड़ने लगेगी.
दशहरा और दुर्गा पूजा में भी नहीं मिले पैसेंजर
नवरात्र के पहले दिन से आईआरसीटीसी ने तेजस का संचालन शुरू किया. उम्मीद थी कि नवरात्र पर्व के साथ ही दशहरा पर यात्रियों की भीड़ तेजस में सफर के लिए उमड़ेगी, लेकिन यात्रियों को तेजस का सफर नहीं भाया. लिहाजा, 25 से 30 फीसदी ही सीटें बुक हुईं. फेस्टिवल सीजन में यात्रियों के यात्रा न करने से आईआरसीटीसी की उम्मीदों को झटका लग रहा है. अब अधिकारी दीपावली आने की बाट जोह रहे हैं, उन्हें यकीन है कि दीपावली में तेजस पूरी तरह भरकर चलेगी.