लखनऊ:राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र के सम्मेलन में राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने बजटीय प्रावधान पर चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर फोकस किया. उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया. साथ ही कैग की रिपोर्ट के चार साल विलम्ब से आने पर चिंता व्यक्त की और ब्यूरोक्रेसी की परफॉर्मेंस को कैग रिपोर्ट से सम्बद्ध करने की आवश्यकता बताई. इस दौरान उन्होंने ब्यूरोक्रेसी पर करारा प्रहार किया.
'बजट लिटरेसी पर नहीं होती चर्चा'
राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी ने कहा कि सरकारें कोई भी हों. वे प्लान बजट के बारे में जनता को सही जानकारी नहीं देतीं. जनता को मूर्ख बनाया जाता है. उसे बजट की सही जानकारी का पूरा अधिकार है. हम बजट में प्रावधान पर चर्चा करते हैं, लेकिन बजट लिटरेसी के बारे में चर्चा नहीं करते. विधायकों को बजट लिटरेसी के बारे में जानना चाहिए. बजट के बारे में पूरी जानकारी उन्हें होनी चाहिए.
'बजट का हो सरलीकरण'
उन्होंने कहा कि बजट का एक बड़ा सा पुलिंदा दे दिया जाता है. मुझे नहीं लगता कि कोई एमएलए उसे पूरा पड़ता होगा. पढ़ने पर समझ में भी नहीं आता है, इसलिए इसका सरलीकरण किया जाना चाहिए. साफ-साफ लिखा जाना चाहिए.
'ब्यूरोक्रेसी के परफॉर्मेंस कैग से हो सम्बद्ध'
सीपी जोशी ने कहा कि कैग (CAG) की रिपोर्ट हर साल आती है, लेकिन वह कई वर्ष पुरानी होती है. सरकार चली जाती है तब रिपोर्ट आती है. नए विधायकों को इस रिपोर्ट से क्या लेना देना? उन्हें तो अपने क्षेत्र के बारे में सोचना होता है. उनकी रुचि प्लान बजट में होती है. ब्यूरोक्रेसी का यह जाल है. उसी की कमी है. उन्होंने कहा कि हम ब्यूरोक्रेसी की पीठ थपथपाते हैं. अगर कैग की रिपोर्ट हर साल आएगी तो काम की समीक्षा की जा सकेगी. इसलिए जरूरी है कि ब्यूरोक्रेसी के परफॉर्मेंस को सीएजी से सम्बद्ध करना चाहिए. गड़बड़ी करने वाले ब्यूरोक्रेसी के लोग लगातार प्रमोशन पर प्रमोशन ले रहे हैं.
'व्यवस्था परिवर्तन जरूरी'
राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हमें नहीं पता है कि कौन बच्चे पढ़ना चाह रहे हैं. पहले अशिक्षित लोगों का एक बड़ा समाज था. अब हम यह कैसा समाज तैयार कर रहे हैं जो 10वीं फेल समाज है. उन्होंने कहा कि कक्षा एक में भी बच्चे फेल हो रहे हैं, लेकिन हम पास कर देते हैं. यह 10वीं फेल समाज कौन लोग हैं. वह सभी गरीब, वंचित और शोषित तबके के हैं. हम किस तरह की शिक्षा दे रहे हैं. इस पर बात होनी चाहिए. व्यवस्था परिवर्तन जरूरी है.