लखनऊ : देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 अप्रैल 2022 को पीएम स्वामित्व योजना का शुभारंभ किया था. प्रदेश में इस योजना को घरौनी योजना के नाम से भी जाना जाता है. यह योजना गांवों में आबादी की जमीन के विवादों को कम करने और ग्रामीणों को उनके घरों की जमीनों का मालिकाना हक देने के मकसद से लाई गई थी. यही नहीं इस योजना के तहत घरौनी प्रमाण पत्र मिल जाने के बाद ग्रामीण अपनी जमीनों पर गृहऋण भी पा सकेंगे. अभी तक मालिकाना हक न होने के कारण गांवों में लोगों को गृह ऋण की सुविधा नहीं है. प्रदेश में इस योजना का काम जून 2023 तक पूरा कर लेना था, हालांकि यह अवधि पूरी हो चुकी है और अभी काम पूरा नहीं हो पाया है. उम्मीद जताई जा रही है कि 2024 के आरंभ में प्रदेश में इसे पूरा कर लिया जाएगा. देश में इस योजना के क्रियान्वयन की अवधि 2025 तक कर दी गई है.
सरकारी दावों के अनुसार प्रदेश के 90 हजार 908 गांवों में अब तक 66 लाख से अधिक स्वामित्व प्रमाण पत्र वितरित किए जा चुके हैं. दावा किया जा रहा है कि 47 हजार से अधिक गांवों में स्वामित्व प्रमाण पत्र तैयार कर लिए गए हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्व विभाग को यह काम इसी वर्ष के अंत तक पूरा करने के सख्त निर्देश दिए हैं. गौरतलब है कि जिस तरह खेतों की भूमि संबंधी दस्तावेज को खतौनी कहते हैं, उसी तर्ज पर घरों की भूमि को घरौनी नाम दिया गया है. इस योजना के तहत हर घर का 13 अंकों वाला यूनीक आईडी नंबर दर्ज होगा. इसमें पहले छह अंक गांव के नाम की पहचान वाले हैं और इसके बाद के पांच अंक आबादी और भूमि अथवा प्लाट की पहचान बताने वाले. शेष दो अंक संपत्ति के संभावित विभाजन को दर्शाएंगे. योजना के तहत सभी भू स्वामियों को उनके मालिकाना हक का प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा, जो उनकी आवासीय भूमिका आधिकारिक दस्तावेज बनेगा.