लखनऊ:मुसलमानों के पवित्र सफर हज पर इस साल असमंजस की स्तिथि बनी हुई है. सऊदी अरब सरकार की ओर से भारत सरकार को हज 2020 को लेकर कोई जवाब नहीं मिलने के चलते 2 लाख हज यात्रियों में सफर को लेकर बेचैनी है. ऐसे में उलमाओं ने आजमीन से मायूस नहीं होने के साथ हज को लेकर बेहतर उम्मीद जताई है. हालांकि हज के मामलों के जानकार सऊदी अरब और भारत सरकार के सामने इस वर्ष कई चुनौतियां मान रहे हैं, जिसके चलते इस वर्ष हज यात्रा पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं.
इस्लाम के 5 मूल स्तंभ में से एक हज के सफर को माना जाता है. हर मुसलमान जो हज का खर्च उठा सकता है उस पर हज को फर्ज (जरूरी) करार दिया गया है. हर वर्ष हज करने दुनिया भर से 25 से 30 लाख मुसलमान सऊदी अरब में इकट्ठा होते हैं और हज के अरकान को अदा करते हैं, लेकिन इस साल कोरोना काल में सफर-ए-हज पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं.
सऊदी अरब सरकार ने भारत सरकार को अबतक हज से जुड़ी जानकारी नहीं दी है, जिससे भारत के 2 लाख आजमीन असमंजस में हैं. हज कमेटी ऑफ इंडिया ने फैसला करते हुए देश के सभी प्रदेशों की हज समितियों को हज यात्रियों के आवेदन रद्द कराने पर उनका पूरा पैसा वापस करने का निर्देश दिया है. हालांकि उलमा ने आजमीने हज को मायूस नहीं होने और इस वर्ष भी हज होने की उम्मीद जताई है.