लखनऊः राजधानी लखनऊ कैंट स्थित सेना चिकित्सा कोर केंद्र एवं कॉलेज के मैदान पर दो दिवसीय अग्निपथ योजना के तहत महिला सैन्य पुलिस अग्निवीर भर्ती रैली का आयोजन किया गया है. यहां उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की महिला अभ्यर्थियों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. जोश और उत्साह से लबरेज इन महिला अभ्यर्थियों ने मंगलवार को घने कोहरे और धुंध के बीच दौड़ लगानी शुरू की तो पल भर में ही मैदान नाप लिया.
लॉन्ग जंप और हाई जंप लड़कियों ने कमाल किया
महिला अभ्यर्थियों की दौड़ के दौरान सेना के अधिकारी मौके पर मौजूद थे. इन महिला अभ्यर्थियों द्वारा तय समय से कम समय में ही दौड़ पूरी करने पर सभी आश्चर्यचकित रह गए. 6 मिनट से लेकर 6 मिनट 15 सेकंड के अंदर ही तमाम महिला अभ्यर्थियों ने दौड़ की बाधा पूरी कर ली. इसके बाद लॉन्ग जंप और हाई जंप में भी उन्होंने कमाल कर दिया. इस बार अग्नीवीर महिला सैन्य पुलिस भर्ती रैली की खास बात ये भी रही कि पिछली बार की तुलना में इस बार लगभग दोगुनी तादाद में महिला अभ्यर्थियों ने हिस्सा लिया. सेना के अधिकारी इसे अपनी उपलब्धि मान रहे हैं और उम्मीद जाता रहे हैं कि आने वाले दोनों में इस तरह की भर्ती रैली में 100 प्रतिशत महिला अभ्यर्थी हिस्सा लेंगी.
फिजिकल टेस्ट के लिए 1511 महिला अभ्यर्थी को बुलाया गया
बता दें कि 28 नवंबर को महिला सैन्य पुलिस भर्ती में लखनऊ जिले की 260, अमेठी की 213, बरेली की 96, पिथौरागढ़ की 32, अल्मोड़ा के 63 और लांस डाउन की 63 महिला अभ्यर्थियों को बुलाया गया था. 27 नवंबर को वाराणसी की 240, आगरा की 316 और मेरठ की 227 महिला अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट के लिए एएमसी सेंटर पर कॉल किया गया था. 27 नवंबर को यहां कुल 783 महिला अभ्यर्थियों को बुलाया गया था तो 28 नवंबर को आयोजित की गई. भर्ती के लिए 728 महिला अभ्यर्थियों को कॉल लेटर जारी हुआ था. कुल मिलाकर 1511 महिला अभ्यर्थियों को अग्निपथ योजना के तहत अग्निवीर महिला सैन्य पुलिस भर्ती के फिजिकल टेस्ट के लिए एएमसी सेंटर पर कॉल किया गया था.
बेटियों की बढ़ती संख्या हमारे गर्व का क्षण
जोनल रिक्रूटमेंट ऑफिस उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के डायरेक्टर कर्नल अजय पटियाल ने "ईटीवी भारत" से बताया कि इस बार की अग्निवीर महिला सैन्य पुलिस भर्ती को लेकर लड़कियों में काफी उत्साह है. यह हमारे लिए बहुत ही गर्व की बात है. फिगर्स की बात करें तो पिछले बार अराउंड 35 प्रतिश फुटफॉल था इस बार लगभग 70 प्रतिशत फुटफॉल है. इसका श्रेय दो चीजों को देना चाहूंगा. पहला मैसिव आउटरीच कैंपेन हर लेवल पर किया गया और दूसरा मीडिया ने आगे तक यह संदेश प्रसारित किया.