जालौन: कोरोना काल में शरीर को स्वस्थ और इम्यूनिटी मजबूत बनाने के लिए रसायनमुक्त फल और सब्जीयों के सेवन पर जोर दिया गया. इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र जालौन में वैज्ञानिक पद पर तैनात डॉ. राजकुमारी ने पोषण वाटिका के मॉडल को तैयार करते हुए अनूठा प्रयास शुरू किया. जिसमें युवाओं और महिलाओं को जागरूक करने के साथ प्रशिक्षण दिया गया. आज हजारों महिलाएं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ती इस प्रयास से लाभ अर्जित कर रही हैं.
जिला मुख्यालय उरई से 20 किलोमीटर दूर कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को लगातार उन्नत बीज उपलब्ध कराने के साथ आयुर्वेदिक और जैविक खेती करने पर प्रेरित करता रहता है. कोरोना महामारी के दौर में लोगों को जैविक सब्जियां व फल की जरूरत महसूस हुई, ताकि इम्यूनिटी सिस्टम को मजबूत किया जा सके. इसके लिए डॉ. राजकुमारी ने किसानों व लोगों को पोषण वाटिका के महत्व को समझाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र में पोषण वाटिका का मॉडल तैयार किया. इसके द्वारा यह बताने की कोशिश की गई कि कुपोषण को दूर करने के लिए छोटे से जगह में भी मौसमी हरी सब्जियां उगाई जा सकती हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र में रबी के मौसम के अनुकूल सब्जी का पोषण वाटिका तैयार किया गया है. जिसमें- बैगन, मूली, गाजर, फूल गोभी, बंधा गोभी, धनिया, लाल साग व हरा साग लगाए गए हैं. डॉ. राजकुमारी ने बतया कि केंद्र सरकार बच्चों को कुपोषण से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार अभियान चला रही है. जिसके लिए पोषण सप्ताह भी मनाया जाता है. उन्होंने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को भी कुपोषण मुक्त रखने के लिए पोषण वाटिका से तैयार हरी सब्जी देना है. इसके लिए आंगनबाड़ी केंद्रों सरकारी स्कूल या घर में उपलब्ध जगह पर पोषण वाटिका तैयार की जा सकती है.