चित्रकूट: जिले में फैले झोलाछाप डॉक्टरों के मकड़जाल से आम जनता को बचाने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुधवार को कई क्लीनिकों में छापेमारी की. इस दौरान टीम ने दो युवकों को गिरफ्तार किया. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यह कार्रवाई मानिकपुर थाना क्षेत्र की पुलिस के साथ मिलकर की.
मामले की जानकारी देते चिकित्सा अधीक्षक. पकड़े गए दोनों युवक बंगाल के रहने वाले हैं. उनमें से एक युवक कई सालों से चित्रकूट में ही रह रहा है. वहीं सूचना मिलने के बाद कई झोलाछाप डॉक्टर अपनी क्लीनिकों में ताले जड़ कर भाग निकले.
लोगों की मजूबरी का फायदा उठा रहेझोलाछापडॉक्टर
जिले में गांव ही नहीं कस्बों में भी ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों ने अपनी जड़ें जमा रखी है, जो कि 10वीं और 12वीं पास होकर अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे हैं. गरीब और अनपढ़ जनता इनको डॉक्टर समझकर उतना ही सम्मान करती है, जितना सम्मान एक डॉक्टर को मिलता है. ऐसे में यह उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल करते हैं.
ये भी पढ़ें: चित्रकूट: अनाधिकृत विद्यालयों के संचालन पर होगा 1 लाख का जुर्माना
सरकारी अस्पतालों में नहीं रहते डॉक्टर
ऐसा नहीं है कि गांव में सरकार द्वारा अस्पताल नहीं बनाया गया है पर इन अस्पतालों में कभी-कभी ही डॉक्टर मिलते हैं, जिसका फायदा यह झोलाछाप डॉक्टर उठाते हैं. कई बेरोजगार युवक पैसा कमाने के उद्देश्य से दूसरे प्रांतों जैसे-बंगाल और बिहार से आकर खुद को डॉक्टर बता अपनी प्राइवेट प्रैक्टिस करते हैं. जो कभी क्लीनिक में वार्ड बॉय हुआ करते थे. वह आज उत्तर प्रदेश में आकर डॉक्टर बन गरीब और अनपढ़ जनता का इलाज करते हैं.
दो लोगों को टीम ने गिरफ्तार किया है. इनके पास भारतीय चिकित्सा परिषद से रजिस्ट्रेशन है, लेकिन सीएमओ के यहां रजिस्ट्रेशन नहीं है. उन्हें रजिस्ट्रेशन दिखाने के लिए कहा गया है. ये लोग धोखाधड़ी के तहत धन अर्जित कर रहे थे. मुख्य चिकित्साधिकारी के आदेश पर यह कार्रवाई की गई है.
-डालचंद्र, चिकित्सा अधीक्षक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र