बस्ती:जनपद का प्राचीन ताल चंदो उपेक्षा का शिकार है. इतना ही नहीं, ताल के किनारे स्थित शहीद उदय प्रताप सिंह पक्षी विहार भी बदहाल हो गया है. हालत यह है कि कभी पर्यटकों से गुलजार रहने वाला पक्षी विहार आज लोगों के लिए तरसता है. चंदो ताल को वन विभाग ने साल 1997 में विकसित किया था.
करोड़ों की लागत से बना पक्षी विहार बदहाली पर बहा रहा आंसू. पक्षी विहार में खर्च की गई तीन करोड़ से अधिक धनराशिचंदो ताल से सटे स्थल को शहीद उदय प्रताप सिंह पक्षी विहार के रूप में विकसित किया गया. इस पर तीन करोड़ से अधिक की धनराशि खर्च भी की गई, लेकिन बदलते समय के साथ चंदो ताल का स्वरूप सिमटता गया. जलकुंभी के चलते ताल की गहराई कम हो गई. हालांकि 2016 में 26 लाख रुपये सिल्ट और जलकुंभी हटाने के नाम पर खर्च किया गया. मगर ताल से न तो जलकुंभी हटी और न ही सिल्ट निकाली गई.
पक्षी विहार में लगाई गई कई तरह की वाटिकातकरीबन 7 साल बाद नेशनल वेटलैंड कंजर्वेशन प्रोग्राम के तहत चंदो ताल को चयनित कर उत्तर प्रदेश वन निगम की धन से इसके विकास की पहल की गई. मगर नाम मात्र काम होने के बाद ताल को उसके हाल पर छोड़ दिया गया. इसके साथ-साथ पक्षी विहार भी रखरखाव के अभाव में जर्जर स्थिति में पहुंच गया. पक्षी विहार में कई तरह की वाटिका लगाई गई हैं. इनमें नक्षत्र वाटिका, तीर्थंकर वाटिका, बुद्ध वाटिका और हरिशंकर वाटिका शामिल हैं.
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देखभाल के अभाव में वाटिका में लगाए गए पौधे नष्ट हो गए
इन वाटिका में बरगद, पीपल, शिरीष, बहेड़ा, देवदार, खजूर, अंगूर जैतून, अंजीर, मेहंदी, बबूल, अशोक सहित तमाम प्रकार के पेड़ पौधे शामिल हैं. लेकिन हालत यह है कि वाटिका में लगाए गए तमाम पौधे देखभाल के अभाव में सूख कर नष्ट हो गए हैं. क्यारियों में पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए गए पिलर टूटे पड़े हैं. इतना ही नहीं, सुरक्षा व्यवस्था न होने के कारण नीलगाय तक अंदर चली आती हैं और पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं.
यहां के झूले टूट चुके हैं. नीलगाय अंदर आकर पौधों को नुकसान पहुंचा देती हैं. लोग भी कम आते हैं.
-सलाउद्दीन, कर्मचारी
पक्षी विहार के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया था और लगभग 50 लाख स्वीकृत भी हो गए हैं. इसमें मुख्य रूप से धन ताल की साफ-सफाई के लिए उपयोग होगा. तीन महीने के अंदर इसमें बदलाव दिखने लगेगा.
-नवीन शाक्य, डीएफओ
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