आजमगढ़ : 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा ने गठबंधन कर भाजपा को टक्कर देने का फैसला लिया था. देश और प्रदेश की जनता ने एक बार फिर से भाजपा के पक्ष में मतदान किया. चुनाव के बाद सपा और बसपा एक दूसरे पर भले ही तंज कसने लगे हों, लेकिन आजमगढ़ के सपा केंद्रीय कार्यालय पर आज भी बसपा सुप्रीमो मायावती और कांशीराम की तस्वीरें लगी हुई हैं.
आजमगढ़: मायावती ने तोड़ दिया गठबंधन, अखिलेश की उम्मीद अभी बाकी - बसपा ने तोड़ा गठबंधन
बसपा प्रमुख मायावती ने सपा से अलग होने की घोषणा कर दी है. हालांकि, सपा की ओर से अभी गठबंधन निभाने की रस्म अदायिगी की जा रही है.
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मायावती, अखिलेश यादव (फाइल फोटो).
सपा केंद्रीय कार्यालय में अभी भी लगी हैं मायावती और काशीराम की तस्वीरें.
सपा कार्यालय में लगी मायावती व कांशीराम की तस्वीरें:
- 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को रोकने के लिए सपा बसपा हुए थे साथ.
- चुनाव परिणाम आने के बाद से ही गठबंधन में दरार पड़ने लगीं.
- मायावती ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा के यादव मतदाताओं ने गठबंधन प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान नहीं किया था.
- मायावती ने स्पष्ट करते हुए कहा कि आगामी 12 विधानसभा के उपचुनाव में बसपा अपने दम पर लड़ेगी.
- मायावती ने कहा कि लोकसभा चुनाव में मुस्लिम प्रत्याशियों को अखिलेश यादव टिकट देने के खिलाफ थे.
गठबंधन में सबसे ज्यादा फायदा किसको हुआ:
सपा-बसपा के गठबंधन में सबसे ज्यादा फायदा बसपा को हुआ था. बता दें कि बसपा को 2014 के लोकसभा चुनाव में एक भी सीट नहीं मिली थी. वहीं बसपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में 11 सीट, जबकि समाजवादी पार्टी को बसपा से गठबंधन का फायदा नहीं मिल सका. इसके बाद भी समाजवादी पार्टी बसपा सुप्रीमो मायावती पर अभी भी उम्मीदें जता रही है.