लखनऊ:यूक्रेन से भारत पहुंचने वाले उत्तर प्रदेश के निवासियों को राज्य में पहुंचाने की व्यवस्था प्रदेश सरकार की ओर से की जाएगी. यूक्रेन से दिल्ली पहुंचने वाले उत्तर प्रदेश के लोगों को जिलों तक यूपी रोडवेज के जरिए उत्तर प्रदेश सरकार मुफ्त पहुंचाएगी. इसकी जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त को दी गई है. लखनऊ से लेकर यूक्रेन तक इस संबंध में भारत सरकार के साथ उत्तर प्रदेश सरकार समन्वय स्थापित कर रही है और हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिया गया है.
राज्य सरकार के प्रवक्ता ने शनिवार को बताया कि प्रदेश के स्थानिक आयुक्त को निर्देशित किया गया है कि वे यूक्रेन से आने वाले प्रदेश के नागरिकों की सुविधा के लिए एयरपोर्ट पर काउंटर स्थापित करें. केंद्र सरकार और अन्य समस्त संबंधित से समन्वय स्थापित करते हुए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराएं. उल्लेखनीय है कि, उत्तर प्रदेश सरकार ने यूक्रेन में उत्पन्न आपातकालीन परिस्थितियों के दृष्टिगत प्रदेश के विद्यार्थी/व्यक्ति, जो अभी यूक्रेन में हैं. उन तक सहायता पहुंचाने के लिए विदेश मंत्रालय, भारत सरकार और भारतीय दूतावास, कीव से समन्वय के लिए राहत आयुक्त और सचिव, राजस्व विभाग रणवीर प्रसाद को नोडल अधिकारी नामित किया है. साथ ही, प्रदेश में कन्ट्रोल रूम (24x7) स्थापित किया गया है, जिसका टोल फ्री हेल्पलाइन नं.-(0522) 1070, मोबाइल नं.-9454441081 तथा ई-मेल आईडी. rahat@nic.in है.
कानपुर दर्शन पुरवा निवासी एमबीबीएस चौथे वर्ष का छात्रा जेन्सी सिंह ने अपने परिवार को वीडियो मेसेज भेज कर आप बीती सुनाई .साथ ही साथ उसने पोलैंड बॉर्डर पे लगी लंबी कतार का भी वीडियो भेज कर यूक्रेन की परिस्तिथियों से भी अवगत कराया. जेन्सी ने बताया कि हालात दिन पे दिन बिगड़ते जा रहे हैं. खाने -पीने की व्यवस्था ना होने की वजह से वो खतरा उठाकर अपने फ्लैट पे खाना खाने की लिए आई है.
हाथरस में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध होने की वजह से हिंदुस्तान की तमाम छात्र छात्राएं वहां फंसे हुए हैं, जिनके परिवार के लोग बेहद परेशान हैं. बहुत कम खुशनसीब हैं जिनके परिवार के बच्चे वतन वापस आ गए हैं आ चुके हैं. हाथरस जिले की सादाबाद के रहने राजेंद्र चौधरी का बेटा आलोक चौधरी यूक्रेन के टार्नीपिल शहर की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है. वहां उसका यह तीसरा साल है. आलोक ने वायरल वीडियो में कहा है यहां एंबेसी में कोई नहीं है और कोई भी उत्तर नहीं देने वाला है. बच्चे दो दिनों से यहां खुले में पड़े हैं. 35 किलोमीटर पैदल चल कर आई यह कैसी भी कोई भी सुनवाई नहीं है. उसने अनुरोध किया है कि हमारा यह वीडियो इंडिया गवर्नमेंट तक पहुंचे और हमारे वतन वापसी लिए कुछ किया जाए. हाथरस के सादाबाद से कई मेडिकल स्टूडेंट फंसे हुए हैं, जिनके माता-पिता बहुत चिंतित हैं.
दहशत में बीत रहा है समय:-हृति सिंह
उन्नाव के औरास थाना क्षेत्र के दिपवल गांव की रहने वाली बेटी युक्रेन पढ़ने गयी थी. रूस से युद्ध के चलते वहाँ पर हृति सिंह फंस गई है. पिछले 4 सालों से वहां पर रह कर पढ़ाई कर रही है. हृति सिंह ने बताया कि रात-रात मेट्रो स्टेशन पर बिताना पड़ रहा है. यहां के हालात खराब हो गए हैं. बम दगने के आवाज रात से लेकर सुबह तक सुनाई पड़ रही है. अभी दो घण्टे से आवाज नहीं आई है. 4 ब्रेड 300 रुपए के मिलते हैं. पहले का जो स्टॉक था उसी से गुजारा कर रहे हैं.
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