गोरखपुर : जिले में जिला पंचायत सदस्य के 68 वार्डों की मतगणना रविवार सुबह 8 बजे से शुरू हुई थी. वोटों की गिनती का काम सोमवार देर रात तक चलता रहा. सोमवार को ही शाम तक कई वार्डों की गणना पूरी हो चुकी थी.
परिणाम जिला मुख्यालय से घोषित होना था लेकिन प्रत्याशियों और एजेंटों द्वारा बार-बार मतगणना प्रक्रिया में व्यवधान उत्पन्न करने से तय सीमा में जीते हुए प्रत्याशियों के बीच प्रमाण पत्रों का वितरण नहीं किया जा सका. ऐसे में बुधवार को कलेक्ट्रेट परिसर में पूरी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शाम 4 बजे तक सभी 68 वार्डों के जीते हुए जिला पंचायत सदस्यों को रिटर्निंग ऑफिसर ने प्रमाण पत्र वितरित किया.
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वितरित किया गया प्रमाण पत्र
जिला पंचायत सदस्यों के परिणाम घोषित होने में देरी के चलते जीते हुए कई प्रत्याशियों के मन में परिणाम को लेकर संशय पैदा हो गया. वहीं, राजनीतिक दलों के पदाधिकारी भी कलेक्ट्रेट के आसपास चक्कर लगाते रहे. कुछ वार्डों के प्रत्याशियों ने मतगणना में मनमानी का आरोप भी लगाया. ऐसे में जिला प्रशासन ने पूरी तन्मयता और तत्परता के साथ कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन कराते हुए निर्वाचित प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र का वितरण किया.
सपा को मिली जीत
पंचायत चुनाव को लेकर बीते एक वर्ष से चल रही भाजपा की तैयारी का रिपोर्ट कार्ड अब आ चुका है. पिछली बार के मुकाबले जिला पंचायत सदस्यों की 8 सीटें अधिक जीतने का परिणाम भले ही संतोष देने वाला है लेकिन कुल 68 में से महज 20 वार्डों में ही पार्टी को जीत मिली. इस जीत ने पदाधिकारियों को चिंतन पर विवश कर दिया है. इन सब के बीच की 4 सीटों पर बागियों का कब्जा राजनीतिक हलके में चर्चा का विषय भी बना रहा. वहीं, विधानसभा चुनाव में हार का दंश झेलने वाली समाजवादी पार्टी ने लंबे समय बाद पंचायत चुनाव में जीत का स्वाद चखा. 20 वार्डों में समर्थित उम्मीदवारों की जीत का दावा करने वाली समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव के लिए इसे अच्छा संकेत मान रही है. इस बार जनपद में निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कई राजनीतिक दलों की रणनीति को बिगाड़ कर रख दिया. वहीं, पार्टी से बागी प्रत्याशी भी कई सीटों पर हार का मुख्य कारण साबित हुए.