पाली.लॉकडाउन के बीचपाली से एक ऐसी कहानी सामने आई है. जिसे सुनकर राजनीति कुर्सियों पर आधिपत्य जमाने वाले राजनीतिक चेहरे भी घबरा जाएंगे. एक महिला जिसने पांच साल में 75 करोड़ के चेकों पर साइन किए, आज वो महिला अपने बच्चों का पेट पालने के लिए इधर से उधर चक्कर लग रही है.
बता दें कि 10 साल पहले तक जिस महिला को प्रधान मानते हुए उसकी आवभगत की जा रही थी. वही 35 वर्षीय महिला आज अपने बच्चों का पेट भरने के लिए पाली जिला कलेक्ट्रेट के बाहर राहत सामग्री पाने के लिए भटकती नजर आ रही है. यह 35 वर्षीय रेशमा नायक के साथ हो रहा है.जो पिछले पांच साल से गरीबी में ही जीवन बीता रही है.
मुख्यमंत्री से भी की मुलाकात
वर्ष 2010 से लेकर 2015 तक और हॉट पंचायत समिति में अधिकारी से लेकर जनप्रतिनिधि रेशमा के सामने उसके इशारे का इंतजार करते थे. पूरे क्षेत्र के लोग इसके इर्द-गिर्द मंडराते थे, क्योंकि वह कांग्रेस की ओर से रोहट पंचायत समिति की प्रधान बनी थी. उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे, जिनसे मिलने का मौका भी रेशमा को तीन-चार बार मिला था. मगर पांच साल गुजर जाने के बाद सीट से हटते ही कांग्रेस का संगठन भी रेशमा को भूल गया और फिर से वह अपने ससुराल में कच्चे मकान में चूल्हा-चौका व बच्चों की परवरिश में लग गई.
अचानक शनिवार को यही रेशमा एक बार फिर कलेक्ट्रेट में प्रकट हुई. वह किसी सरकारी मीटिंग में भाग लेने नहीं आई थी, बल्कि अपना व अपने पांच बच्चों का पेट भरने के लिए प्रशासन से राशन सामग्री के किट मांगने आई थी. तीन घंटे वह कलेक्ट्रेट परिसर में बैठी रही, लेकिन प्रशासनिक अफसर से नहीं मिल पाई क्योंकि वे शहर के राउंड पर थे.
उस समय कलेक्ट्रेट में कुछ कांग्रेस नेता भी पहुंच गए. जिनसे उसने मदद की गुहार लगाई. उसने जब अपना परिचय दिया कि वह भी कांग्रेसी है और रोहट की प्रधान रही है. जिसके बाद नेता उसे दिलासा देकर अपने साथ ले गए.
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