विश्व प्रसिद्ध धींगा गवर मेले का हुआ आयोजन जोधपुर. सूर्यनगरी में बीती रात भीतरी शहर में रौनक रही. धींगा गवर के अंतिम दिन रात को महिलाएं अलग अलग स्वांग और वेष धरकर निकली. इसलिए इसे कार्निवाल कहे तो भी गलत नहीं होगा. जिसके लिए तैयार होने में ही घंटों मेहनत लगी यह साफ नजर आ रहा था. इससे पहले 16 दिन की पूजा संपन्न होने के बाद माता की आरती की गई सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद लिया. उसके बाद रात को महिलाएं बाहर निकली. कोई वकील, कोई डॉक्टर, कोई महादेव पार्वती, अर्धनारीश्वर, ब्रह्मा, विष्णु, कांतरा के पुर्जली देव और भूल भुलैया की मंजुलिका समेत कई रूप लेकर आई.
सूर्यनगरी में बीती रात भीतरी शहर में रौनक रही करीब दो सौ महिलाएं अलग अलग स्वांग लेकर उतरी थी, जिनको देखने जबरदस्त भीड़ उमड़ी. इस दौरान युवा उनसे बेंत खाने को लालायित नजर आए. पूरी रात पुलिस की तैनाती रही. एक दो जगह पर उत्साही युवकों पर डंडे भी फटकारे गए. यह सिलसिला अलसुबह तक चलता रहा. महिला शक्ति का प्रतिक यह मेला अपने आप में अनूठा है. इस तरह का आयोजन राजस्थान में कहीं पर भी नहीं होता है.
कई जगह पर गवर माता बैठाई गई गवर माता को करोड़ों के आभूषण पहनाए :भीतरी शहर की गलियों में कई जगह पर गवर माता बैठाई गई, जिनको मोहल्ले वासियों ने हीरे जवाहरात और सोने के आभूषणों से सजाया. सुनारों की घाटी में की गवर माता को देखने के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा यहां तिल रखने की जगह भी नहीं बची. करीब बीस जगह पर गवर विराजित हुई. जिनको करोड़ों के आभूषण से सजाया गया. पूरे मेले में सुरक्षा की दृष्टि से जगह जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए.
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मेकअप में लगता है पूरा दिन : मेले में स्वांग बनकर आने वाली तीजणियों ने आज पूरे दिन इसकी तैयारी की. इसके बाद वे मैकअप के लिए गई. सबसे फेमस जगह जालोरी गेट का स्टूडियों है. हरिओम सेन का परिवार चार पीढ़ियों से यह काम कर रहा है. इसके अलावा इस बार कई मेकअप आर्टिस्ट बाहर से बुलाए गए. एक रूप बनाने के लिए खर्च भी बड़ा होता है. धार्मिक और पौराणिक और फिल्मी पात्रों के गेटअप पाने में मैकअप पर ही घंटों लग जाते हैं. स्वांग धर संदेश भी दिया जाता है. इस बार कुछ महिलाओं ने मोबाइल के बजाय माता पिता को समय देने का संदेश दिया.