झुंझुनूं.शेखावाटी की जीवन रेखा के नाम से जानी जाने वाली काटली नदी अपना अस्तित्व खोती जा रही है. जब इस नदी में पानी आता है तो सिरानी पीर की दरगाह को छू लेती है. .लोग काटली नदी के उफान व बहाव को नहीं भूले हैं. वहीं नई पीढी काटली नदी की जानकारियों से अंजान हैं.
लागों ने बताया कि कई बार तो इतना पानी आता था कि सड़कों पर पानी भर जाता था.जिससे लोगों का आवागमन रूक जाता था. वहीं कई लोग इस नदी से परिचित भी थे तो कई अंजान. उदयपुरवाटी के आस-पास के गांवों में काटली नदी को पचलंगी, पापडा, जोधपुरा, बाघोली, सुनारी गांव में इस कदर खोदा गया है कि आगे पानी की निकासी ही नहीं है. पिछले तीन दिन से नेवरी, ककराना, मैनपुरा, केड, खटकड़, भाटीवाड़, सीथल, शिवनाथपुरा आदि गांवों के लोग काटली नदी के आने का इंतजार कर रहे हैं.