जालोर. जिले में चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की बड़ी लापरवाही सामने आई है. चितलवाना क्षेत्र के आकोली निवासी एक मनरेगा श्रमिक का सैम्पल लिए बिना ही उसकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने का मामला सामने आया है. जिसके बाद एक बार तो युवक को कोविड-19 केयर सेंटर भेजने के लिए चिकित्सा विभाग की टीम युवक के घर पहुंच गई. इसके बाद युवक ने टीम को बताया कि उसका सैम्पल लिया ही नहीं गया है, तो वह पॉजिटिव कैसे आ सकता है. इसके बाद आनन-फानन में टीम ने युवक के सैम्पल लेकर जांच के लिए भेजे. ऐसे में अब विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं.
जानकारी के अनुसार बीते 6 जुलाई को आकोली गांव में पीएचसी से एक टीम मनरेगा श्रमिकों के सैम्पल लेने के लिए गई थी. इस दौरान टीम ने 85 लोगों के सैम्पल लेने के लिए रजिस्ट्रेशन किया और नम्बर वाइज सैम्पल लिए. जबकि युवक का दावा है कि उसने नाम तो लिखवाया था, लेकिन भीड़ ज्यादा थी और नम्बर आने से पहले ही निकल गया था. ऐसे में उसका सैम्पल नहीं हो पाया था, जबकि रिपोर्ट में उसके नाम की रिपोर्ट पॉजिटिव बताई जा रही है. ऐसे में अब सवाल खड़ा हो रहा है कि पीड़ित व्यक्ति के नाम की जगह किसी ओर का सैम्पल लिया गया है या वह खुद पॉजिटिव है और झूठ बोल रहा है.
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