चित्तौड़गढ़.पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चित्तौड़गढ़ पुलिस अधीक्षक अनिल कयाल ने गुरुवार दोपहर साल भर का लेखा-जोखा पेश किया. इसमें मुख्य रूप से साल 2018 के मुकाबले साल 2019 में दर्ज अपराधों में 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि सरकार के आदेश पर सभी प्रकरण दर्ज कर रहे हैं. वहीं महिला अत्याचारों के मामले में 40 फिसदी की वृद्धि हुई है. इसके उलट जिले में अनुसुचित जााति जनजाति अत्याचार अधिनियम के तहत साल भर में दर्ज मामलों में से एक तिहाई मामले फर्जी पाए गए हैं.
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले में साल 2018 के मुकाबले साल 2019 में 11.44 फिसदी मुकदमे ज्यादा दर्ज हुए हैं. वहीं सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु के आंकड़े में भी कमी आई है. सड़क हादसों में मृत्यु के मामले में कमी आने का मुख्य कारण पुलिस की सजगता बताते हुए उन्होंने कहा कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ की गई कार्रवाईयों से इस आंकड़े में कमी आई है. पुलिस आने वाले समय में लगातार ये कार्रवाई करती रहेगी. उन्होंने बताया कि साल 2018 में सड़क दुर्घटनाओं में 270 व्यक्तियों की जिले में मृत्यु हुई थी, जबकि साल 2019 में ये आंकड़ा 245 हो गया.
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अपराधियों की धर पकड़ के मामले में पुलिस अधीक्षक ने जानकारी दी कि जिले के प्रत्येक थाने में दस अपराधियों की बनाई सूची के अनुसार 250 अपराधी चिन्हित किए थे. वहीं इसमें से 84 अपराधी गिरफ्तार किए जा चुके हैं. जिनमें हार्डकोर अपराधियों में शामिल 35 हजार रूपए का इनामी बदमाश शोएब लाला भी शामिल है. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जिले के विभिन्न थानों में हत्या के कुल 31 मामले दर्ज कर 16 में चालान दिया गया और 7 फर्जी पाए गये. बलात्कार के कुल 138 मामले इस साल दर्ज किये गए, जबकि साल 2019 में 98 मामले दर्ज हुए थे. इस साल सम्पत्ति संबंधी अपराधों में डकैती का एक, लूट के 51, नकबजनी के 225 व चोरी के 873 मामले दर्ज किये गये. यह मामले साल 2018 की तुलना में करीब 15 फिसदी अधिक है.