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मार्च क्लोजिंग: बूंदी में विद्युत विभाग को वसूलने है 110 करोड़ रुपए, सरकारी दफ्तरों के 32 करोड़ बकाया - Bundi news

बूंदी में विद्युत विभाग को मार्च क्लोजिंग में 110 करोड़ रुपए की वसूली करनी है और 110 करोड़ों में से 32 करोड़ पर सरकारी दफ्तरों से वसूलने हैं. 31 मार्च का लक्ष्य विद्युत विभाग के पास है और सभी सरकारी दफ्तरों एवं आमजन को 1 हफ्ते का समय विभाग की ओर से दिया गया है अगर 1 हफ्ते के अंदर विद्युत बिल जमा नहीं होते हैं तो विद्युत विभाग कनेक्शन काटने के लिए टीमें गठित कर देगा.

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सरकारी दफ्तरों के 32 करोड़ बकाया

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Published : Mar 12, 2020, 9:04 AM IST

बूंदी.वर्ष 2019- 20 का मार्च क्लोजिंग का महीना चल रहा है और सभी विभागों को मार्च क्लोजिंग के तहत अपनी बकाया वसूली करनी है, लेकिन बूंदी के विद्युत विभाग के सामने 110 करोड़ रुपए की बकाया वसूली करने की बड़ी चुनौती है. विद्युत विभाग ने इसको लेकर कार्रवाई भी शुरू कर दी है, सभी ब्लॉक स्तर से लेकर फीडर इंचार्ज तक फील्ड में दौड़ा दिए गए हैं और 110 करोड रुपए की बकाया वसूली करने को लेकर विभाग के पसीने भी छूट रहे हैं. इन 110 करोड़ों में से अकेले 23 करोड़ तो सरकारी दफ्तरों के ही हैं और सबसे ज्यादा विद्युत विभाग बूंदी की नगर परिषद से अपनी बकाया वसूली के रूप में 13 करोड़ रुपए वसूलने हैं.

सरकारी दफ्तरों के 32 करोड़ बकाया

विभाग का मानना है कि सरकारी दफ्तर हो या आमजन सभी ने विद्युत विभाग की सेवाएं बराबर तो ले ली लेकिन अब वही लोग विद्युत विभाग का बकाया नहीं छुपता कर रहे हैं. टीमें लगातार आमजन और सरकारी दफ्तरों में नोटिस देकर बकाया राशि को चुकाने को लेकर भी जोर दे रही है, लेकिन आधा मार्च पूरा होने में आया अभी तक भी विद्युत विभाग के पास राशि नहीं पहुंची है. जिसके चलते विद्युत विभाग के पसीने भी छूट रहे हैं.

इसके साथ ही विभाग के अधिकारी यह भी दावा कर रहे हैं, कि शत-प्रतिशत हम इस 110 करोड रुपए के लक्ष्य को पूरा कर लेंगे. सबसे बड़ी परेशानी विद्युत विभाग के सामने सरकारी दफ्तरों से वसूली करना है. विभाग भले ही मीडिया के सामने सरकारी दफ्तरों की बिजली काटने की चेतावनी देता हो, लेकिन असल में यह बात एक सपना साबित होती है क्योंकि विद्युत विभाग सरकारी दफ्तरों में नोटिस के अलावा कुछ कर नहीं सकता.

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इन सरकारी दफ्तरों से वसूलनी है राशि

बूंदी विद्युत विभाग को बूंदी की नगर परिषद से पानी की मोटर से खपत होने वाली बिजली के 13 करोड़ रुपए वसूलने हैं साथ में पीएचईडी विभाग से 3 करोड़ 30 लाख रूपए, जनता जल योजना से 2 करोड़ 12 लाख रुपए, जिला प्रशासन से 17 लाख रुपए, पुलिस विभाग से 30 लाख 73 हजार, राजीव गांधी केंद्र से 13 लाख, जिले की सभी नगर पालिकाओं से 85 लाख, सार्वजनिक निर्माण विभाग से 17 करोड़ 5 हजार, शहर की विद्युत सड़क लाइट से 7 करोड़ 75 लाख रुपए, शिक्षा विभाग से 20 लाख 50 हजार, जिले के सभी तहसील भवनों से 15 लाख रुपए, जिले के सभी उपखंड अधिकारी भवनों से 7 लाख 70 हजार, जिले के वन विभाग से 2 लाख 70 हजार, बीएसएनल टेलीकॉम से 51 लाख 56 हजार, जिले के स्वास्थ्य महकमे से 17 लाख रुपए वसूलने हैं.

कुल मिलाकर विधुत विभाग को बूंदी के सरकारी दफ्तरों से 32 लाख से अधिक राशि को वसूलना है. इसको लेकर सभी विभागों को बूंदी के विद्युत विभाग ने नोटिस भी जारी किए हैं, जिनमें 7 दिवस के अंदर अंदर राशि को जमा कराने के लिए चेतावनी भी दी है और कहा है कि अगर विभाग इन राशि को जमा नहीं करवाता है तो उनके कनेक्शन काट दिए जाएंगे.

खास बात यह है, कि बूंदी नगर परिषद के सबसे ज्यादा 13 करोड़ रुपए पानी की मोटर में खपत होने वाले बिजली के बिल के हैं और विद्युत विभाग चेतावनी दे रहा है कि बिजली का बिल जमा नहीं हुआ तो हम पानी की मोटर के कनेक्शन काट देंगे ऐसे में कनेक्शन काटा तो बूंदी में पानी की सप्लाई बिना मोटर के नहीं हो पाएगी.

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सभापति महावीर मोदी इस मसले पर विद्युत विभाग को ही घेरे हुए हैं और कहते हुए नजर आ रहे हैं कि विद्युत विभाग को हमने समय समय पर भुगतान भी किया है और यह भुगतान मेरे पूर्व के कार्यकाल से ही नगर परिषद पर चढ़ता हुआ आया है और जहां तक नगर परिषद के कनेक्शन काटने की बात है, तो हमारे कनेक्शन विद्युत विभाग नहीं काट सकता, क्योंकि हमारी जमीन पर विद्युत विभाग के ट्रांसफार्मर और पोल लगे हुए हैं उनके आज दिन तक हमने पैसे नहीं लिए तो दोनों ही विभाग सामंजस्य स्थापित करके कार्रवाई करें ऐसा उनका मानना है.

अब देखना होगा, कि विद्युत विभाग के सामने मार्च पूरा होने में कुछ ही दिन बचे हैं और 110 करोड रुपए की राशि को पूरे जिले भर से वसूलना है. सभी कर्मचारियों को विद्युत विभाग ने दौड़ाया हुआ है और लक्ष्य की पूर्ति करने का दावा विधुत विभाग कर रहा है. देखना होगा की बूंदी का विद्युत विभाग अपने 110 करोड़ रुपए की राशि को वसूल पाता है या नहीं या फिर कनेक्शन कटेंगे ?

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