भीलवाड़ा.राजस्थान में निजी विद्यालयों में फीस को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने प्राइवेट स्कूल को 100 फीसदी फीस देने की इजाजत दी है, जिसके कारण प्रदेशभर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लेकर अभिभावकों में रोष व्याप्त हो गया है. निजी स्कूलों में फीस को लेकर हमेशा अभिभावक और स्कूल प्रशासन आमने-सामने हुआ है, लेकिन कोरोना काल के दौरान बंद रहे स्कूलों में फीस को लेकर चल रहे विवाद के चलते कपड़ा नगरी भीलवाड़ा में भी अभिभावकों ने अपना विरोध जताया.
अभिभावक संघ के जिलाध्यक्ष सुनील कोठारी ने ईटीवी भारत से बातचीत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश हाल ही में आया है, वह सरासर गलत है. कोरोना काल के बाद अभी भी अभिभावक आर्थिक बोझ के तले दबा हुआ है, अभी तक अभिभावक इस आर्थिक तंगी से उबर नहीं पाया है. उन्होंने कहा कि लॉक डाउन के समय अनावश्यक खर्चा हुआ है, ऑनलाइन क्लासेस में मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर जैसे ऑनलाइन गैजेट खरीदना और उनका इंटरनेट बिल के साथ ही विभिन्न प्रोजेक्ट में जो खर्चा हुआ है, जो अभी तक अभिभावक उबर नहीं पाया है. इसी के बाद अब स्कूल शुरू होने के साथ अभिभावक को दोबारा खर्चा करके स्कूल को पूरी फीस चुकानी होगी.
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उन्होंने सवाल किया कि जहां एक तरफ केंद्र और राज्य सरकार ने कोरोना काल के बाद हर क्षेत्र में राहत पहुंचाई है, तो शिक्षा की ओर अभिभावक को कोई राहत क्यों नहीं दी गई? जब निजी स्कूल को मान्यता राज्य सरकार ही देती है तो फीस का निर्धारण भी राज्य सरकार को ही करना है. हाईकोर्ट ने भी कोविड 19 पीरियड के दौरान इसमें राहत देते हुए 60 से 70 फीसदी स्कूल फीस देने का आदेश दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने तो पूरे 100 फीसदी ही फीस देने का आदेश दे दिया है. ऐसे में अब अभिभावक स्कूल की फीस कैसे चुकाये. हमारा तो यह मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने एक पक्ष की ओर देखते हुए आदेश फरमाया है.