जयपुर.हर वर्ष मई माह के पहले मंगलवार को विश्व अस्थमा दिवस (world asthma day) के रूप में मनाया जाता है. इस बार 3 मई को ये मनाया जा रहा है. बीते कुछ सालों में अस्थमा यानी सांस से संबंधित बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है और बढ़ते प्रदूषण के बाद, कोरोना महामारी के कारण भी अस्थमा के मरीजों में बढ़ोतरी देखने को मिली है, अस्थमा की समस्या हर उम्र के व्यक्तियों में देखी जा रही है. चिकित्सकों का कहना है कि बीते कुछ समय से अस्थमा संबंधित बीमारियों ने तेजी से मरीजों को घेरना शुरू कर दिया है.
कोरोना ने बढ़ाई तादाद: वर्ष 2019 में डब्ल्यूएचओ ने जो आंकड़े जारी किए वो इसको लेकर चेतावनी देते हैं. जारी किए गए आंकड़ों की बात करें तो वर्ष 2019 में तकरीबन 262 मिलियन लोगों को अस्थमा ने प्रभावित किया और इस बीमारी से तकरीबन 4 लाख से अधिक मरीजों की मौत भी दर्ज की गई. जयपुर के आर यू एच एस अस्पताल के अधीक्षक और अस्थमा रोग विशेषज्ञ डॉक्टर अजीत सिंह का कहना है कि विगत कुछ सालों से प्रदूषण अस्थमा के रोग का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है. पिछले दो साल से कोविड-19 संक्रमण महामारी के बाद भी अस्थमा के मरीजों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है (corona has increased the risk of asthma) और स्वस्थ व्यक्ति जब कोविड-19 संक्रमण की चपेट में आ रहा है तो कुछ मरीजों में पोस्ट कोरोना साइड इफेक्ट के रूप में अस्थमा के लक्षण देखने को मिल रहे हैं.
क्या है अस्थमा?:अस्थमा एक प्रमुख गैर संचारी रोग (एनसीडी) है, जो बच्चों और वयस्कों दोनों को प्रभावित करता है. फेफड़ों में छोटे वायुमार्ग की सूजन और संकीर्णता अस्थमा के लक्षण पैदा करती है, जिससे खांसी, घरघराहट, सांस की तकलीफ और सीने में जकड़न का एहसास होता है. सांस की दवा अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित कर सकती है और अस्थमा से पीड़ित मरीज सामान्य, सक्रिय जीवन जी सकते हैं. आमतौर पर इलाज नहीं लेने के कारण अधिकांश अस्थमा मरीजों की मौत तक हो जाती है.