जयपुर. राजस्थान की राजनीति में पिछले 20 दिन से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन प्रदेश में जारी सियासी संग्राम खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. सियासत के मैदान में शुरू हुई नूरा कुश्ती हर दिन नई करवट लेती जा रही है. पायलट की नाराजगी से शुरू हुआ राजनीतिक घमासान अब दो मोर्चों पर लड़ा जा रहा है. पहला मोर्चा कोर्ट है तो दूसरा मोर्चा राजनीति का वो मैदान है, जहां बयानों के बाण हर पल जारी हैं. गहलोत गुट पिछले 5 दिनों से जैसलमेर में आगामी रणनीति पर काम कर रहा है.
इस राजनीतिक खींचतान के बीच मंगलवार को सबकी निगाहें राजस्थान हाईकोर्ट पर टिकी रही, क्योंकि हाईकोर्ट में विधायकों के वेतन रोकने और राज्यपाल की ओर से सत्र नहीं बुलाने पर उन्हें पद से हटाने सहित 3 महत्वपूर्ण मामलों पर सुनवाई की गई. सियासी संग्राम के बीच मंगलवार को क्या कुछ रहा खास, देखें ये रिपोर्ट...
विधायकों के वेतन रोकने की जनहित याचिका
राजस्थान हाईकोर्ट ने बाड़ेबंदी में बंद विधायकों के वेतन भत्ते रोकने के संबंध में दायर जनहित याचिका पर दखल से इनकार कर दिया है. अदालत ने याचिकाकर्ता को कहा है कि वह संबंधित प्राधिकारी के समक्ष इस संबंध में अपना अभ्यावेदन पेश करें.
राज्यपाल को पद से हटाने की याचिका
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्यपाल के खिलाफ दायर याचिका को सारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है. साथ ही सुनवाई के दौरान मामले में एसके सिंह की ओर से पेश याचिका को वापस लेते पर अदालत ने उसे भी खारिज कर दिया है. अदालत ने कहा कि राज्यपाल सत्र आहूत करने की अनुमति दे चुके हैं, ऐसे में याचिका सारहीन हो गई है.
हाईकोर्ट ने विधायक भंवरलाल शर्मा की ओर से SOG और ACB में दर्ज मामलों के खिलाफ पेश चारों याचिकाओं पर एक साथ 13 अगस्त को सुनवाई करना तय किया है. साथ ही अदालत ने एसओजी की 2 एफआईआर को लेकर पेश याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शिकायतकर्ता महेश जोशी से जवाब तलब किया है.
विधायक खरीद-फरोख्त मामले में SOG ने राजद्रोह से जुड़ी तीनों FIR ली वापस
विधायक खरीद-फरोख्त मामले में एसओजी ने राजद्रोह से जुड़ी तीनों FIR वापस ले ली है. राज्य सरकार की ओर से मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट अदालत में प्रार्थना पत्र पेश कर कहा गया कि आरोपियों के खिलाफ राजद्रोह का मामला बनना साबित नहीं हो रहा है. ऐसे में प्रकरण की पत्रावली को एसीबी कोर्ट में भेजा जाए.