जयपुर. दिव्यांग व्यक्तियों को बराबरी का मौका और अधिकार देने के लिए हर साल 3 दिसंबर को विश्व विकलांग दिवस (World Disability day 2020) मनाया जाता है. इस दिवस का मनाने के पीछे मकसद है कि दिव्यांग को उपेक्षा के बजाय समाज में उन्हें समान हक और अधिकार मिले. जब हम आज विकलांग दिवस की बात कर रहे हैं तो बात करते हैं बच्चों की.
बहरेपन के लिए कोकलियर इंप्लांट्स वरदान 6 फीसदी बच्चे बहरेपन का शिकार...
कई बच्चे जन्म से ही या जन्म के दौरान विकलांगता का शिकार हो जाते हैं. इसमें भारत में 6 फीसदी ऐसे बच्चे हैं जो बहरेपन का शिकार (deafness in children) होते हैं. यही नहीं जन्म लेने वाले करीब एक हजार बच्चों में से 4 बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें बचपन से ही सुनने की समस्या होती है. अगर जरा सी अभिभावक जागरुकता और समझदारी से काम लें तो ऐसे बच्चों का समय पर इलाज हो सकता है और ये मासूम आम जिंदगी जी सकते हैं.
Cochlear Implants साबित हो सकता है वरदान...
जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के सीनियर ENT रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहनीश ग्रोवर बताते हैं कि बधिर बच्चों के लिए कोकलियर इंप्लांट्स वरदान साबित हो सकता है. कोकलियर इंप्लांट्स के माध्यम से जो बचपन से ही सुन नहीं पाते हैं, ऐसे बच्चों की समस्याओं को दूर किया जा सकता है. समय रहते अगर बच्चे की बीमारी का पता लग जाए तो उनकी समस्या दूर हो सकती है.
Cochlear implantation से जुड़े तथ्य सर्जरी कर कान में लगाई जाती है मशीन...
डॉक्टर ग्रोवर का कहना है कि ऐसे बच्चे यह इंप्लांट लगाया जाता है, यह एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस होती है. जिसे सर्जरी द्वारा कान के अंदरूनी भाग में लगाया जाता है. यह मशीन सीधे तंत्रिका तंत्र पर असर डालती है. जिससे बच्चे को सुनने वाली परेशानी दूर हो जाती है. हालांकि, सर्जरी के बाद उन्हें स्पीच थेरेपी की जरूरत होती है.
600 से अधिक बच्चों को मिली नई जिंदगी...
मोहनीश ग्रोवर ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी टीम ने जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में कोकलियर इंप्लांट (Cochlear implantation in SMS Hospital Jaipur) की शुरुआत की गई है और बड़ी संख्या में इस तरह के बच्चों को आम जिंदगी दी है. अब तक अस्पताल में 600 से अधिक कोकलियर इंप्लांट्स किए गए हैं.
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आमतौर पर कोकलियर इंप्लांट से जुड़े उपकरण (Cochlear Implant Equipment) काफी महंगे आते हैं, लेकिन हाल ही में राज्य सरकार ने सीएम रिलीफ फंड (CM Relief Fund) की शुरुआत की है तो ऐसे में आम लोगों की पहुंच में भी कोकलियर इंप्लांट हो गया है.
6 फीसदी बच्चे बहरेपन का होते हैं शिकार सरकार पॉलिसी बनाने की तैयारी में...
वहीं, राज्य सरकार से लंबे समय से यह भी गुहार लगाई जा रही थी कि जल्द से जल्द कोकलियर इंप्लांट्स को लेकर एक पॉलिसी (policy on cochlear implants in Rajasthan) तैयार की जाए. इससे जुड़े उपकरण काफी महंगे आते हैं तो ऐसे में राज्य सरकार एक पॉलिसी बनाने पर विचार कर रही है. जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार वालों तक भी यह सर्जरी पहुंच सके.