जयपुर. राजस्थान में ही नहीं अन्य राज्यों में भी बिजली का संकट गहराता जा रहा है. कोयले की कमी और बढ़ते बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है. मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा बिजली संकट राजस्थान में ही नहीं देश के कमोबेश सभी राज्यों में है. ऐसे में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि राज्यों को उनके हाल पर छोड़ने की बजाए , इस संकट से निकालें.
सचिवालय में अत्याधुनिक स्वागत कक्ष का लोकापर्ण करने कब बाद प्रदेश में चल रही बिजली संकट को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि संकट पूरे देश में है, केंद्र सरकार को चाहिए कि वह सभी राज्यों से संपर्क करे. वहां की स्थिति को समझे. अधिकांश राज्य बिजली संकट से गुजर रहे हैं, केंद्र सरकार को सूचित भी कर चुके हैं. संकट कितना बड़ा होगा इसके बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता.
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कोल इंडिया को चाहिए वह खुद आगे बढ़कर राज्यों से बातचीत करें क्या रिक्वायरमेंट है राज्यों की उसकी जानकारी ले?. गहलोत ने कहा कि खाली कोल माइंस में पानी भर गया बारिश से , यह एक कारण हो सकता है. लेकिन जहां तक मुझे जानकारी मिली है कई प्लांटस के कॉन्ट्रैक्ट फेल हो गए. यह क्राइसिस पूरी कंट्री में है काफी राज्य में है. गहलोत ने कहा कि दिल्ली राजधानी देख लो वहां क्या हो रहा है , कोयले की डिमांड चार पांच गुना ज्यादा बढ़ गई है और उसके बाद भी पूरा कोयला नहीं मिल रहा है. कोयला उपलब्ध नहीं है इतनी बड़ी अजीबोगरीब स्थिति बन रही है. उन्होंने कहा कि मार्च तक यह संकट रहेगा यह सुनते ही हमें आश्चर्य हो रहा है. ऐसे वक्त में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है तमाम राज्यों को संकट से निकाले.
बकाया का हिसाब बाद में करें, पहले समस्या का हल निकालें
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि बकाया रुपयों को लेकर बाद में हिसाब किया जा सकता है. यह मामूली बातें हैं. जब हम करोड़ों अरबों रुपए के कोयले खरीदते हैं तो 5- 6 करोड़ क्या मायने रखते हैं. केंद्र की जिम्मेवारी है वह राज्यों को बिजली सकंट से निकाले. राज्यों के ऊपर जिम्मेदारी डालने से कुछ नहीं होगा.