जयपुर.राजस्थान बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भंवरलाल शर्मा का शुक्रवार को निधन हो गया. भंवरलाल 95 वर्ष के थे. वरिष्ठ नेता के निधन पर तमाम बीजेपी नेता सोशल मीडिया पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की. वहीं शनिवार को बीजेपी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए.
पार्थिव शरीर को पहनाई गई संघ की काली टोपी बाल्यकाल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे स्वर्गीय भंवरलाल शर्मा के पार्थिव शरीर को भी संघ की काली टोपी पहनाई गई. वहीं जनसंघ और बीजेपी में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने के चलते उनके पार्थिव शरीर को बीजेपी कार्यालय भी ले जाया गया. जहां पार्टी के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए.
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इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भेजा गया पुष्प चक्र नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने, जबकि बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की ओर से भेजा गया पुष्प चक्र बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने अर्पित किया. वहीं मुख्य सचेतक महेश जोशी सीएम अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट की तरफ से भेजे गए पुष्प चक्र को अर्पित करने बीजेपी कार्यालय पहुंचे.
तीन बार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रहे भंवर लाल शर्मा का जीवन सादगी से भरा था, उनके जीवन परिचय पर नजर डालें...
5 दिसंबर 1924 को जयपुर में जन्म
22 मई 1950 में विवाह बंधन में बंधे
1961 में नगर परिषद के चेयरमैन चुने गए
1972 में किशनपोल से चुनाव लड़ा
1975 में आपातकाल में सत्याग्रह कर कारागृह में रहे
1977 में हवामहल विधानसभा से चुनाव लड़ पहली बार विधायक बने
1978 में पहली बार मंत्री बने उच्च शिक्षा, यूडीएच और खेल मंत्री रहे
1980 से 1990 तक विधायक
1986 में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष
1989 में दोबारा प्रदेश अध्यक्ष बने
1990 में दोबारा यूडीएच, खेल और जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री बने
2000 से 2002 तक तीसरी बार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने उनके व्यक्तित्व से जुड़े संस्मरण को बताते हुए कहा कि स्वर्गीय भैरो सिंह शेखावत के उपराष्ट्रपति बनने के बाद प्रदेश में वो सबसे सीनियर थे. ऐसे में नेता प्रतिपक्ष भी उन्हें ही बनना था. बावजूद इसके भंवर लाल शर्मा ने उस दौर में ये उत्तर दायित्व उन्हें दिया. बिना स्वार्थ के राजनीति करने के भंवर लाल शर्मा उदाहरण रहे हैं.
वहीं, उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि जीवन पर्यंत वो सादगी से जीते रहे. राठौड़ ने बताया कि एक बार उनके निर्वाचन क्षेत्र में भंवर लाल शर्मा किसी उद्घाटन के लिए आए. लेकिन सर्किट हाउस में रुकने के बजाय वो सुबह ही संघ कार्यालय जा पहुंचे. ऐसे सरल व्यक्तित्व के धनी का चला जाना, राजस्थान की राजनीति के लिए अपूर्णीय क्षति है.
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वहीं पूर्व मंत्री अरुण चतुर्वेदी ने बताया कि भंवरलाल शर्मा व्यक्तिगत रूप से उनके और पार्टी के हजारों कार्यकर्ताओं के अभिभावक थे. अपने अंतिम समय में भी वो पार्टी और कार्यकर्ताओं की सुध लेते रहे. उन्होंने बताया कि 1993 में पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था. उस दौरान बानसूर से विधायक रहे रोहिताश शर्मा ने भी बीजेपी को समर्थन दिया. लेकिन, बीजेपी उन्हें स्वीकार करेगी या नहीं इसे लेकर उनके मन में सवाल थे.
इस दौरान भंवर लाल शर्मा ने अपनी धर्मपत्नी को बुलाकर रोहिताश शर्मा को रसोई घर में ले जाने को कहा और ये सुनिश्चित किया कि अब तो आप घर के सदस्य हैं. अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि उनके व्यक्तित्व के ऐसे कई उदाहरण हैं, जो प्रेरणा देने वाले हैं.
इस दौरान वी. सतीश, राजेंद्र राठौड़, रामचरण बोहरा, अशोक परनामी, अशोक लाहोटी, अलवर विधायक संजय शर्मा, मोती डूंगरी मंदिर महंत कैलाश शर्मा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई प्रचारक भी मौजूद रहे. हालांकि लॉकडाउन के चलते प्रदेश के कई जिलों के कार्यकर्ता और पदाधिकारी श्रद्धांजलि सभा में शामिल नहीं हो पाए.