जयपुर. प्रदेश की सरकार सभी विधायकों के लिए सरकारी आवास की सुविधा मुहैया करवाती है. वर्तमान में बात करें तो विधायकों को गांधीनगर, विधायक नगर पूर्व, विधायक नगर पश्चिम, जालूपुरा और विधायक पुरी में सरकारी आवास आवंटित किए हैं. लेकिन अब सरकार चाहती है कि मंत्रियों के अलावा जितने भी विधायक हैं उन्हें एक ही बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाए.
विधायकों के लिए नए फ्लैट्स पर खर्च होंगे 230 करोड़, फिर बिकने वाले बंगलों के रेनोवेशन क्यों सरकार ने हाल ही में विधायक नगर पश्चिम और जालूपुरा स्थित सरकारी बंगलों में रह रहे जनप्रतिनिधियों को मकान खाली करने के नोटिस दे दिए हैं. जहां विधायक नगर पश्चिम में 56 विधायकों और जालूपुरा में 28 विधायकों को आवंटित सरकारी आवास एक महीने में खाली करना है. इनमें से जालूपुरा के 28 सरकारी बंगले जो 1000 वर्ग गज से भी ज्यादा है, उन्हें बेचकर मिलने वाले पैसे से विधायक नगर पश्चिम में डेढ़ सौ से ज्यादा 4 बीएचके फ्लैट बनाए जाएंगे. इस पूरे प्रोजेक्ट में करीब 230 करोड रुपए खर्च होने हैं, जो जालूपुरा के सरकारी आवासों को बेचकर ही चुकाए जाएंगे.
अब सवाल यह कि इधर तो विधायकों को आवास खाली करने के नोटिस दे दिए हैं और उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था के लिए रेंट के तौर पर 30 हजार रुपए मासिक दिए जाएंगे जब तक कि नए फ्लैट्स बन नहीं जाते. वहीं, उधर जिन आवासों को खाली करवाने के आदेश सरकार ने दिए हैं, उनके रिनोवेशन पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं. जबकि इन्हें बेचा जाएगा.
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वहीं, अब विधायकों के लिए भी समस्या यह भी आ गई है कि अगर वे एक माह में आवास खाली करते हैं तो अचानक कहां शिफ्ट होंगे. हालांकि विधायकों से मौजूदा आवास खाली करने के साथ ही सरकार नए फ्लैट मिलने तक अपनी पसंद के आवास विकल्प भी बताने के लिए कहा है. सरकार के इस आदेश बाद भी ज्यादातर विधायक यह नहीं चाहते कि वे अपना वर्तमान आवास खाली करें.
इसके पीछे बड़ी वजह यह है कि जालूपुरा में जो सरकारी आवास हैं वो बंगलानुमा हैं और अच्छा स्पेस भी है. वहीं, इनके रेनोवेशन का काम भी विधायक अपनी मर्जी से करवा रहे हैं. कई विधायकों ने तो अपने खर्च पर भी निर्माण कार्य कराए हैं. अब जब सरकार इन्हें बेचने जा रही है तो ऐसे में रिनोवेशन पर खर्च हुआ पैसा व्यर्थ होना तय है. हालात यह है कि कुछ बंगलों में तो अब भी रिनोवेशन का काम चल रहा है.
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अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि अगर जालूपुरा के बंगले बेचने ही हैं तो इनके रिनोवेशन पर खर्चा क्यों किया जा रहा है. इस मामले पर प्रदेश के यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल का कहना है कि रेनोवेशन के काम तो चलते रहते हैं. भले ही सरकार के मंत्री ने तो आसानी से कह दिया कि इस तरह के काम चलते रहते हैं लेकिन इन बंगलों पर इनोवेशन के नाम पर मोटा पैसा खर्च हुआ है. ऐसे में यह सरकारी पैसे की बर्बादी नहीं तो और क्या है.