मुण्डावर (अलवर).जिले के मुण्डावर में राशन डीलर संघ मुण्डावर की ओर से विभिन्न मांगों के निस्तारण की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम राम सिंह राजावत को ज्ञापन सौंपा गया. ज्ञापन ब्लॉक अध्यक्ष सत्यनारायण के नेतृत्व में दिया गया.
ज्ञापन में राशन विक्रेता का गेहूं का कमीशन प्रति क्विंटल 300 रुपए करने बाबत, कोविड-19 की अवधि 28 मार्च 2020 से कार्यरत राशन डीलर जिनकी इस अवधि में किसी भी कारण मृत्यु हो गई है उसके आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति में मृतक डीलर की आयु सीमा और आश्रित की आयु सीमा और योग्यता के प्रावधानों में छूट देने की मांग, खाद्यान पर 2 प्रतिशत छीजत दिए जाने और अन्य मांगों को लेकर विरोध किया गया.
राशन डीलर संघ ने अपनी मांगों को लेकर सौंपा ज्ञापन ब्लॉक अध्यक्ष सत्यनारायण ने उप जिला कलेक्टर राम सिंह राजवतको बताया कि इस मंहगाई के दौर में राशन विक्रेता को 10 रुपए प्रति क्विवंटल गेहूं के कमीशन में अपना परिवार का पालन पोषण करना संभव नहीं हो रहा है. जबकि पड़ोसी राज्य दिल्ली में प्रति क्विंटल गेहूं का कमीशन 200 रुपए और हरियाणा में 150 रुपए दिया जा रहा है.
राजस्थान प्रदेश में डीलर की सेवाओं को देखते हुए कमीशन 300 रुपए प्रति क्विंटल किया जाना चाहिए. जिससे राशन डीलर सुचारू रूप से अपने परिवार का पालन पोषण कर सकें. कोविड-19 की अवधि में कई विक्रेता कोरोना संक्रमित हुए हैं. इनमें कई जनों की मृत्यु भी हो गई. ऐसे डीलर जो किसी कारण से जांच नहीं करवा पाए और उनकी भी इस अवधि में किसी अन्य कारण से मृत्यु हो गई तो उनके परिवार को अनुकम्पा की नियुक्ति का लाभ दिया जाना चाहिए.
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कोविड-19 की आपदा में रोजगार शून्य हो चुका है और ऐसी स्थिति में जिस राशन विक्रेता की मृत्यु हो गई है उसके आश्रित को अनुकम्पा नियुक्ति नहीं दी जाएगी तो उसका परिवार भूखे मरने की स्थिति में आ जाएगा. मृतक राशन विक्रेता की आयु सीमा असीमित और अनिश्चित और आश्रित की आयु 55 साल और आश्रित की शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास निर्धारित की जाए, चाहे राशन डीलर का किसी भी कारण से इस कोविड काल में मृत्यु हो गई हो. खाद्यान्नों पर सरकार की ओर से एक प्रतिशत छीजत देय थी, लेकिन जब से एनएफएसए कानून लागू हुआ है ये छीजत का प्रावधान विलुप्त कर दिया गया है जिसको पुन: कानून के अन्तर्गत लाया जाए और राशन विक्रेता को खाद्यान्न पर दो प्रतिशत की छीजत दिया जाना न्याय हित में होगा.
राशन विक्रेता ने कहा कि जब से पोस मशीन के माध्यम से वितरण हुआ है तब से ही अपने खर्चे पर मशीनों का रख रखाव करने में और मरम्मत कराने में निजी तौर पर खर्चा वहन किया है. इस विषय में कई बार खाद्य विभाग को पत्रों के माध्यम से और चर्चा के माध्यम से अवगत कराया जा चुका है और इस विषय को लेकर जो पोस मशीन सप्लायर थे उनका भुगतान भी रोका गया था.