अजमेर. तीर्थ नगरी पुष्कर में शारदीय पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र सरोवर में हजारों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई. धार्मिक मान्यताओं (devotees Took holy bath in pushkar) के अनुसार शारदीय पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक कार्तिक स्नान का विशेष महत्व है. कार्तिक पूर्णिमा से पहले 5 दिन पंचतीर्थ स्नान पर माना जाता है कि देवी देवता भी पुष्कर के पवित्र सरोवर में स्नान करने आते हैं.
यही वजह है कि श्रद्धालुओं का पुष्कर सरोवर के 52 घाटों और जगतपिता ब्रह्मा के मंदिर में दिनभर तांता लगा रहा. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शारदीय पूर्णिमा का विशेष महत्व है. तीर्थ नगरी पुष्कर में शारदीय पूर्णिमा के दिन मेले जैसा माहौल रहा. बड़ी संख्या में श्रद्धालु पुष्कर सरोवर में स्नान करने पहुंचे. आस्था की डुबकी लगाकर श्रद्धालुओं ने पुष्कर राज की पूजा अर्चना करते हुए घर परिवार में खुशहाली की कामना की. वहीं जगतपिता ब्रह्मा मंदिर के भी दर्शन किए. शारदीय पूर्णिमा के मध्य नजर जगतपिता ब्रह्मा का अभिषेक कर नयनाभिराम श्रृंगार किया गया. इसके बाद मंदिर के पुजारियों ने जगतपिता ब्रह्मा की महाआरती की. मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं का दर्शन के लिए तांता लगा रहा.
हजारों श्रद्धालुओं ने पवित्र सरोवर में लगाई डुबकी देश की उन्नति और प्रगति के लिए की गई प्रार्थनाःमंदिर के पुजारी कृष्ण गोपाल शर्मा ने बताया कि धार्मिक अनुष्ठान के बाद (Devotees in Brahma Temple in Pushkar) जगतपिता ब्रह्मा जी से प्रार्थना की गई कि विश्व का कल्याण हो और देश की उन्नति और प्रगति बनाए रखें. सभी सुखी हों सभी का कल्याण हो का भाव रखते हुए सभी के लिए प्रार्थना की गई.
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कार्तिक स्नान आज से होंगे शुरूःतीर्थ पुरोहित पंडित हरि शर्मा बताते हैं कि शारदीय पूर्णिमा से कार्तिक पूर्णिमा तक (Holy Bath Before Kartik Poornima) पुष्कर के पवित्र सरोवर में कार्तिक स्नान का विशेष महत्व है. श्रद्धालु कार्तिक माह में पुष्कर आकर पवित्र सरोवर में स्नान कर पुष्कराज की पूजा अर्चना करते हैं उन्हें कई गुना पुण्य प्राप्त होते हैं. उन्होंने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा तक सभी देवता पुष्कर में विराजमान रहते हैं. कार्तिक माह में ही जगतपिता ब्रह्मा ने सृष्टि यज्ञ किया था.
वर्ष में 5 दिन सभी देवी देवता यहां विराजमान रहते हैं. कार्तिक माह के अलावा शेष दिनों में देवी देवताओं का आह्वान करना (Sharad Purnima 2022) पड़ता है. पुष्कर में तप करना, भजन करना और रात्रि को पुष्कर में रुकना यह सब भाग्य से होता है. उन्होंने बताया कि पुष्कर सरोवर के चारों ओर 52 घाट है और पुष्कर में 1000 से अधिक मंदिर हैं. उन्होंने बताया कि जगतपिता ब्रह्मा के कमंडल से सुबह पुष्कर सरोवर में गंगा माता, दोपहर में सरस्वती और शाम को रेवा नदी सरोवर में रहती है. यह सरोवर ब्रह्मा सरोवर के रूप में भी जाना जाता है.
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गुरू के पास तो आना ही पड़ता हैःतीर्थ पुरोहित पंडित हरि शर्मा बताते हैं कि पुष्कर सरोवर में स्नान करने से सभी प्रकार के रोग, दोष, कष्ट दूर होते हैं. जो श्रद्धालु अपने पूर्वजों के नियमित श्राद्ध, तर्पण यहां करते हैं. उससे घर में सुख शांति बनी रहती है और वंश में वृद्धि होती है. उन्होंने बताया कि पुष्कर सभी तीर्थों का गुरु है. गुरु के पास तो आना ही पड़ता है. तीर्थों का राजा प्रयागराज हैं तो गंगा सब तीर्थो की मां है. बाबा का स्थान पुष्कर है, शिव का स्थान काशी और विष्णु का स्थान गयाजी है.